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उद्गम स्थल पर नर्मदा तट से हटेंगे शुलभ शौचालय

उद्गम स्थल पर नर्मदा तट से हटेंगे शुलभ शौचालय
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याचिका पर सुनवाई के बाद एनजीटी ने जारी किए निर्देश

विशेष संवाददाता भोपाल

अमरकंटक में नर्मदा नदी के उद्गम स्थल से कपिलधारा तक के बीच तीन किलोमीटर परिक्षेत्र में तट से 100 मीटर सीमा में बने सभी शुलभ शौचालय हटाने के निर्देश राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने दिए हैं। आवेदक संजीव तिवारी की याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिकरण की युगल पीठ ने वीडियोकॉन्फ्रेंसिग द्वारा मंगलवार 19 फरवरी को की गई सुनवाई में शासन से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है कि वह 26 फरवरी तक बताएं कि तट के 100 मीटर के दायरे में बने शौचालय हटाए गए अथवा नहीं।

आवेदक संजीव तिवारी की ओर से पैरवी करते हुए अभिभाषक धर्मवीर शर्मा ने एनजीटी पीठ के समक्ष स्पष्ट किया कि शासन और स्थानीय प्रशासन ने न तो नर्मदा तट से अतिक्रमण हटाया है और न ही वृक्षारोपण ही किया है। जबकि उद्गम स्थल व कपिल धारा के आसपास किनारों पर शुलभ शौचालय बना दिए हैं। इससे अत्यधिक मात्रा में मलमूत्र युक्त गंदगी पवित्र नर्मदा में मिलती हैं। अभिभाषक श्री शर्मा ने स्पष्ट किया कि नर्मदा केवल नदी नहीं है, बल्कि यह एक पवित्र नदी है जो लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है।

आवेदक संजीव तिवारी ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण में यह याचिका 6 जुलाई 2015 में दायर की थी। याचिका में अधिकरण से अनुरोध किया गया था कि मां नर्मदा के अस्तित्व एवं इसके उद्गम स्थल नर्मदा कुंड अमरकंटक की सुरक्षा का अनुरोध किया गया है। याचिका में अनुरोध किया गया है कि अधिकरण मप्र शासन के तत्कालीन मुख्य सचिव केसीएस आचार्य के व्यक्तिगत कक्ष द्वारा जारी की गई रिपोर्ट दिनांक 26 जून 1986 में की गई अनुशंसाओं के क्रियान्वयन हेतु अनावेदकों को निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया था। आवेदक ने याचिका में श्री दिगम्बर जैन क्षेत्रीय विकास समिति, शहडोल, कल्याण सेवा आश्रम ट्रेस्ट, अमरकंटक, मप्र राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिलाध्यक्ष अनूपपुर, सीएमओ नगर पंचायत अमरकंटक, उप संचालक नगर एवं ग्राम निवेश, मे.सन स्टोन क्रेशर, मे. आदित्य स्टोन चिप्स, सकरा वरटोला, श्री बर्फानी आश्रम और सर्वोदय होस्टल अमरकंटक को अनावेदक बनाया है। इन सभी अनावेदकों पर आरोप है कि उन्होंने बिना शासकीय अनुमतियों और अधिकारियों के संरक्षण में नर्मदा तट के उद्गम स्थल के पर्वतों पर लाखों टन बजन के मंदिर और प्रतिमाएं स्थापित किए हैं। राजस्व, वन एवं स्थानीय प्रशासन की भूमि पर अतिक्रमण कर धार्मिक आश्रम, धर्मशालाएं, शिक्षण संस्थान, हॉस्टल आदि बना दिए हैं। वृक्ष काटे जा रहे हैं। होटल, रेस्टोरेंट, स्टोन क्रेशर जैसी व्यवसायिक और वाणिज्यिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। दिगम्बर जैन ट्रस्ट ने अवैध रूप से अतिक्रमण किया है। कल्याण सेवा आश्रम ने अतिक्रमण कर विद्यालय, छात्रावास एवं 100 मीटर के दायरे में तीन मंजिला भवन बना लिया है। बर्फानी आश्रम नर्मदा कुंड से सौ मीटर की सीमा में स्थापित कर लिया गया है। यहां प्राकृतिक झाडिय़ों को साफ नहीं किया गया है, न ही नवीन वृक्ष लगाए गए हैं। जबकि मैकलांचल में खनन माफिया 50 क्रेशर संचालित कर रहा है।

आवेदक करेगा अतिक्रमण हटाने का अनुरोध

मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी को होनी है। आवेदक संजीव तिवारी अभिभाषक धर्मवीर शर्मा के माध्यम से राष्ट्रीय अधिकरण पीठ से अनुरोध करेगा कि नर्मदा के तट के सौ मीटर के दायरे से हर तरह के अतिक्रमण को हटवाया जाए। इसी प्रकार उद्गम स्थल के पहाड़ों और आसपास बनीं रिहायसी, औद्योगिक एवं व्यवसायिक संरचनाओं को भी हटवाया जाए, जिससे पवित्र नर्मदा का अस्तित्व अपने मूल स्वरूप को प्राप्त कर सके।

Updated : 2019-02-19T22:22:54+05:30

Naveen

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