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भांग दरों में फेल, किया दो करोड़ का खेल

भांग दरों में फेल, किया दो करोड़ का खेल
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लुटता रहा खजाना, मौन रहे अधिकारी...

विशेष संवाददाता भोपाल

आबकारी विभाग के अधिकारियों की सांठगांठ सिर्फ अंग्रेजी और देशी शराब के निर्माण और बिक्री में हुई गड़बडिय़ों तक सीमित नहीं रही। भांग ठेकेदारों से गठजोड़ ने भी सरकारी खजाने को करोड़ों का घाटा दिया है। भांग के फुटकर विक्रय मूल्य का निर्धारण नहीं कर अधिकारी जहां ठेकेदारों को फायदा पहुंचाते रहे। वहीं सरकारी खजाने को दो करोड़ का चूना लगा दिया।

भांग के फुटकर बिक्रय के लिए मप्र शासन अन्य राज्य सरकारों के अधिकृत लायसेंसधारी ठेकेदारों से निविदाएं आमंत्रित करता है, जो वनोपज कैनाबिस से भांग एकत्रित करते हैं और अन्य राज्यों को भी आपूर्ति करते हैं। इस प्रकार प्राप्त भांग केन्द्रीय भण्डारगार, खंडवा में संग्रहित की जाती है, जहां से भांग दुकान के अनुज्ञप्तिधारियों को प्रदाय करने हेतु विभिन्न जिलों के देशी मदिरा के भण्डारगारों के प्रभारी अधिकारियों की मांग पर प्रदाय की जाती है। वर्ष 2012-13 से वर्ष 2016-17 की अवधि के लिए राजपत्र अधिसूचनाएं वार्षिक अनुज्ञप्ति शुल्क जमा करने के बारे में निर्धारित करती है कि अनुज्ञप्ति शुल्क 12 बराबर किस्तों में विभाजित किया जाएगा। अनुज्ञप्तिधारक उस महीने का मासिक अनुज्ञप्ति शुल्क पहले कार्य दिवस या पहले ही अग्रिम जमा करेगा। इसके अलावा यदि महीने के पहले सात कार्य दिवसों में अनुज्ञप्ति शुल्क का भुगतान नहीं किया जाता है तो जिलाधीश या तो फुटकर विक्रय दर पर भांग की आपूर्ति कराएंगे या इसकी आपूर्ति को रोक देगे। यदि महीने के अंत से पहले देय अनुज्ञप्ति शुल्क जमा नहीं किया जाता तो जिलाधीश अनुज्ञप्ति निरस्त कर सकते हैं। भांग के लिए निर्धारित अनुज्ञप्ति शुल्क के साथ भांग का प्रदाय किया जाता है। हालांकि, फुटकर ग्राहकों के लिए न्यूनतम विक्रय मूल्य और अधिकतम विक्रय मूल्य के रूप में भांग की फुटकर विक्रय दर विभाग द्वारा निर्धारित नहीं की गई है।

प्रदेश के पांच जिलों खरगौन, भोपाल, उज्जैन, मुरैना और शाजापुर जिनमें तीन सहायक आबकारी आयुक्त कार्यालयों और दो जिला आबकारी अधिकारी कार्यालयों में मांग और संग्रह पंजी और भांग प्रदाय पंजी के अक्टूबर 2016 से जुलाई 2017 के बीच किए गए लेखा परीक्षा नमूना जांच में सामने आया कि विभिन्न महीनों में सभी अनुज्ञप्तिधारियों द्वारा मासिक अनुज्ञप्ति शुल्क देय तिथि से 4 से 50 दिनों के बाद जमा किए जाने के बावजूद सामान्य शुल्क की दर पर 1 लाख 4 हजार किलोग्राम भांग की आपूर्ति की गई। जिससे शासन को 1 करोड़ 99 लाख रुपये की हानि हुई।

किस वर्ष कितना हुआ शुल्क निर्धारण

अनुज्ञप्ति धारियों के लिए वर्ष 2012-13 के लिए 90 रुपये प्रति किलोग्राम, वर्ष 2013-14 से वर्ष 2016-17 के लिए 100 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से शुल्क निर्धारित किया गया। इसी प्रकार औषधीय उत्पाद में उपयोग के लिए वर्ष 2012-13 के लिए 250 रुपये प्रति किलोग्राम एवं वर्ष 2013-14 से 2016-17 के लिए 300 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से शुल्क निर्धारित किया गया।

Updated : 2019-02-12T21:57:25+05:30

Naveen

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