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एमपी कांग्रेस में घमासान से आलाकमान परेशान

-सिंधिया को चाहिए 230 में से 100 टिकट, अन्य नेता राजी नहीं

एमपी कांग्रेस में घमासान से आलाकमान परेशान
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भोपाल/स्वदेश वेब डेस्क। मध्य प्रदेश में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के बीच खत्म नहीं हो रही तनातनी से आलाकमान परेशान है। विधानसभा चुनाव के प्रचार में पार्टी नेताओं में एकजुटता का अभाव है। अन्दर-अन्दर एक दूसरे की टांग खींचने में लगे हैं। इस बारे में दिग्विजय सरकार में मंत्री रहे एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता का कहना है कि राज्य कांग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, सुरेश पचौरी, अजय सिंह राहुल के खेमों में बंट गई है। सब अपने-अपने अधिक से अधिक चहेतों को टिकट दिलवाने की कोशिश में लगे हैं। इसके लिए वह सब उपक्रम शुरू कर दिये हैं जो नहीं होनी चाहिए। इसके तहत एक दूसरे के विरुद्ध दुष्प्रचार से लेकर व्यक्ति आरोप लगाने तक का काम शुरू हो गया है। इसे रोकने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने एक बार सबको साथ बैठाकर बात भी की थी, लेकिन कोई सुनने को राजी नहीं है।

इसके बारे में वरिष्ठ पत्रकार सुरेश मेहरोत्रा का कहना है कि इस बार के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस में नेक टू नेक फाइट है। राज्य कांग्रेस के दिग्गज नेता यदि एकजुट होकर लड़ें, तो चुनाव जीत सकते हैं। लेकिन 15 वर्ष सत्ता से बाहर रहने के बाद भी सुधरे नहीं हैं। यदि कांग्रेस इस बार चुनाव नहीं जीती, तो अगले 15 साल के लिए फिर भूल जाना पड़ेगा। ऐसा मौका अगले 15 साल तक नहीं आयेगा। इसकी वजह बेरोजगारी, किसानों की नाराजगी, सवर्ण व ओबीसी जातियों की नाराजगी, कई घोटाले तथा केन्द्र व राज्य की भाजपा सरकारों द्वारा किये गये तमाम वादे पूरे नहीं करना है। दोनों ही जगह के सत्ताशीर्ष नेताओं की प्रसिद्धि में कमी आई है। राज्य में कांग्रेस के अलावा और कोई विपक्षी बड़ी पार्टी नहीं है। भाजपा 15 वर्ष से सत्ता पर काबिज है और कांग्रेस पैदल है, इसलिए भी कांग्रेस के प्रति लोगों की सहानुभूति बढ़ी है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार मेहनत कर रहे हैं, केन्द्र व राज्य सत्ताशीर्ष पर सीधे हमला कर रहे हैं, इसलिए युवकों में उनकी छवि एक जुझारू की बन रही है। इन सबके चलते कांग्रेस के लिए चुनाव जीतने का यह सुनहरा मौका है।

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि प्रदेश कांग्रेस के दिग्गजों में सबसे ज्यादा तना-तनी टिकटों को लेकर हो गया है। राज्य में कई वर्ष से कड़ी मेहनत कर रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर से लेकर भोपाल, इंदौर इलाकों तक में अपने प्रत्याशी खड़ा करना चाहते हैं। उन्होंने अपने 100 प्रत्याशियों की सूची सौंप दी है। उनमें युवा कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की संख्या अधिक है। वह उस सूची व संख्या में कटौती पर राजी नहीं हैं। जबकि प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व मंत्री सुरेश पचौरी आदि वरिष्ठ कांग्रेसी नेता चाहते हैं कि जो जीतने लायक हो उसी को टिकट दिया जाये। सभी नेताओं के प्रभाव क्षेत्र में उसके खास लोगों, पुराने कार्यकर्ताओं, जीतने वाले को टिकट दिया जाये। राज्य की 230 विधानसभा सीटों में से 100 पर सिंधिया के प्रत्याशी खड़ा करने के लिए कोई राजी नहीं हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि इसको लेकर दिल्ली में बैठक भी हुई थी। यदि सहमति बनी तो एक-दो दिन में प्रत्याशियों की घोषणा हो जाएगी। कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत का कहना है सब कुछ समय से हो जाएगा। कहीं कुछ अड़चन नहीं है।

Updated : 2018-10-28T17:54:13+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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