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ई-टेंडर घोटाला: जांच के लिए सीएफएसएल जाएगी हार्ड डिस्क

सुर्खियां में रहे ई-टेंडर घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू कर रहा है

ई-टेंडर घोटाला: जांच के लिए सीएफएसएल जाएगी हार्ड डिस्क
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भोपाल। बीते दिनों सुर्खियां में रहे ई-टेंडर घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू कर रहा है।जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू ने एमपीएसईडीसी के डेटा सेंटर से तीन हार्ड डिस्क जब्त की हैं।अब ये हार्ड डिस्क सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेब (सीएफएसएल) भेजी जाएंगी।हालांकि बीते दिनों ही जांच में खुलासा हो गया था कि इसमें मुंबई से नही बल्कि भोपाल से की गई थी। जांच एजेंसी को नए आईपी एड्रेस भी मिले थे, जिनमें दूसरे कई विभागों में भी गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।वही दो महिने से ज्यादा बीत जाने के बावजूद इस मामले में अब तक किसी पर भी मामला दर्ज नही किया गया है।

दरअसल, ई-टेंडरिंग घोटाला उजागर होने के बाद राज्य सरकार ने आनन-फानन में जांच का जिम्मा ईओडब्ल्यू को सौंपा गया था। जांच में सामने आया था कि ई-टेंडर में घोटाला सिर्फ जल निगम की नल-जल योजना में ही नहीं, बल्कि पीएचई के दूसरे कार्यों, लोक निर्माण विभाग और मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम सहित दूसरे कई विभागों में भी किया गया है। शुरुआती जांच में एजेंसी को दो आईपी एड्रेस मिले थे। जिस आधार पर जांच एजेंसी ने दावा किया था कि छेड़छाड़ मुंबई में की गई है। लेकिन जांच जब आगे बढ़ी तो पता चला कि गड़बड़ी भोपाल में बैठकर की गई थी।

इसके बाद ईओडब्ल्यू ने एमपीएसईडीसी के डेटा सेंटर से वे कम्प्यूटर जब्त किए, जिससे ई-टेंडर में छेड़छाड़ की गई थी।जब्त हार्ड डिस्क से जांच एजेंसी को जल निगम के तीन, लोक निर्माण विभाग के तीन, सिंचाई विभाग के दो और राज्य सड़क विकास निगम के एक टेंडर से संबंधित डेटा रिट्रीव करना है। वहीं, जांच एजेंसी ने इन विभागों से टेंडर से संबंधित सभी दस्तावेज जब्त कर लिए हैं, इनका परीक्षण किया जा रहा है। अब जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू द्वारा जब्त की गई हार्ड डिस्क सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेब (सीएफएसएल) भेजी जाएंगी, इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि ई-टेंडरिंग घोटाले का खुलासा सबसे पहले लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) के टेंडर प्रक्रिया में हुआ था। एक सजग अधिकारी द्वारा पाया गया कि ई-प्रोक्योंरमेंट पोर्टल में टेम्परिंग करके हजार करोड़ रुपए मूल्य के तीन टेंडरों के रेट बदल दिए गए थे। इस मामले में गड़बड़ी को लेकर विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी ने पीएचई के प्रमुख सचिव प्रमोद अग्रवाल को पत्र लिखा। इसके बाद, तीनों टेंडर निरस्त कर दिए गए। खास बात यह है कि इनमें से दो टेंडर उन पेयजल परियोजनाओं के हैं, जिनका शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 जून को किया था। दरअसल, इस पूरे खेल में ई-पोर्टल में टेंपरिंग से दरें संशोधित करके टेंडर प्रक्रिया में बाहर होने वाली कंपनियों को टेंडर दिलवा दिया जाता था। इस तरह से मनचाही कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट दिलवाने का काम बहुत ही सुव्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया जाता रहा है।

इस खुलासे ने एक तरह से मध्यप्रदेश में ई-टेंडरिंग व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है और इसके बाद एक के बाद एक कई विभागों में ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम में हुए घपलों के मामले सामने आ रहे हैं। अभी तक अलग-अलग विभागों के हजारों करोड़ रुपए से ज्यादा के टेंडरों में गड़बड़ी सामने आ चुकी है, जिसमें मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमपीआरडीसी), लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, जल निगम, महिला बाल विकास, लोक निर्माण, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, नर्मदा घाटी विकास जल संसाधन सहित कई अन्य विभाग शामिल हैं। खास बात यह है कि ईओडब्ल्यू किसी भी मामले में जांच पूरी नहीं कर पाई है।

Updated : 2018-08-21T18:29:10+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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