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प्रमुख विपक्षी दलों के खानदानी नेता थाम सकते हैं भाजपा का दामन

प्रमुख विपक्षी दलों के खानदानी नेता थाम सकते हैं भाजपा का दामन
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नई दिल्ली। प्रमुख विपक्षी दल लोकतंत्र में राजतंत्र की तरह खानदानी हो गये हैं। ये विपक्षी दल जिन परिवार की जेबी पार्टी हैं, उन परिवार में पार्टी व सत्ता पर वर्चस्व को लेकर आपस में बहुत दाव – पेंच, खींच- तान, डाह चल रहा है। चाहे वह महाराष्ट्र की राकांपा, शिवसेना, कर्नाटक की जेडीएस, तमिलनाडु की द्रमुक, आन्ध्र प्रदेश की जन सेना, उ.प्र. की सपा, बिहार का राजद, झारखंड का झामुमो, जम्मू कश्मीर की टीडीपी या इस तरह के अन्य राजनीतिक दल। इन स्थानीय पार्टी वालों के खानदान में जो पार्टी व सत्ता पर कब्जा करने में कमजोर पड़ रहे हैं या किनारे लगा दिये गये हैं , वे आगामी लोक सभा व विधान सभा चुनावों में देश की सबसे ताकतवर पार्टी भाजपा का दामन थाम सकते हैं।

महाराष्ट्र की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख हैं शरद पवार । उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर यह पार्टी बनाई थी। इंडियन एक्सप्रेस समूह के गुजराती अखबार समकालीन के संपादक रहे वरिष्ठ पत्रकार डा. हरिदेसाई का कहना है कि शरद पवार के भतीजे अजीत पवार व बेटी सुप्रिया में पट नहीं रही है। शरद पवार के बाद पार्टी पर वर्चस्व को लेकर अभी से अजीत पवार व सुप्रिया में तनातनी चल रही है। जब तक शरद पवार हैं तब तक तो चल जायेगा , उनके बाद अजीत पवार पार्टी तोड़ सकते हैं। शिवसेना के बारे में उनका कहना है कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे में पार्टी पर वर्चस्व को लेकर जो कुछ चला, उसी के बाद तो राज ठाकरे ने अपनी अलग पार्टी बना ली है।अब राज ठाकरे शिवसेना का नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इसके लिए वह अंदर –अंदर वह सब उपक्रम कर रहे हैं, जिससे शिवसेना को नुकसान हो । भाजपा से उनके संबंध ठीक हैं। शिवसेना के कई लोगों को भाजपा ने तोड़ ही लिया है। और भी कई के तोड़ने की बात चल रही है।

दक्षिण भारत के राजनीतिक मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार पी. वेंकटेश का कहना है कि आन्ध्र प्रदेश में कांग्रेस के बड़े नेता हैं पूर्व केन्द्रीय मंत्री चिरंजीवी । कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के लिए उनके भाई पवन कल्याण जो तेलुगु फिल्म अभिनेता हैं और जन सेना नाम से राजनीतिक पार्टी बनाकर राजनीति कर रहे हैं , अगले लोकसभा व विधानसभा चुनाव भाजपा के साथ गठबंधन करके लड़ सकते हैं, जिसकी बातचीत चल रही है।

तमिलनाडु में द्रमुक पार्टी पर बर्चस्व को लेकर एम.करूणानिधि के बड़े बेटे एमके अलागिरी और उनसे छोटे व पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन में तनातनी चल रही है। स्टालिन ने यदि पार्टी में अलागिरी को सम्मानित जगह नहीं दी, तो वह भाजपा में जा सकते हैं या अपनी अलग पार्टी बनाकर भाजपा के साथ गठबंधन कर सकते हैं।

यही हालत कर्नाटक में है। वहां एचडी देवगौड़ा की पार्टी जेडीएस पर वर्चस्व को लेकर देवगौड़ा के बेटों एचडी कुमारस्वामी और एचडी रवन्ना में बहुत अधिक तनातनी है। एचडी रवन्ना कभी भी भाजपा में जा सकते हैं।

बिहार में राजद के मालिक लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटों तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव में पार्टी पर वर्चस्व को लेकर अंदरूनी खींचतान चल रही है। कहा जाता है कि तेज प्रताप की पत्नी बहुत तेज है। उसकी राजनीतिक महात्वाकांक्षा तेज प्रताप से भी अधिक है। यदि लालू ने बड़े बेटे तेज प्रताप को पार्टी में अपने बाद पावरफुल पद नहीं दिया और उनकी पत्नी को विधायक नहीं बनाया, तो दोनों दूसरी राह पकड़ सकते हैं। इस बारे में राजद के एक पूर्व सांसद का कहना है कि तेज प्रताप को भाजपा व जदयू के भी कुछ नेताओं का प्रोत्साहन मिल रहा है।

झारखंड की प्रमुख विपक्षी पार्टी झामुमो के सर्वेसर्वा शिबूसोरेन के बेटों के परिवार में राजनीतिक वर्चस्व को लेकर तनातनी है। जिस पर भाजपा की निगाह है।

यही हालत उ.प्र. में सपा के मालिक मुलायम सिंह यादव के परिवार की भी है। अखिलेश यादव को सपा अध्यक्ष बनाये जाने से नाराज उनके चाचा शिवपाल यादव बगावती मुद्रा में पहले से चल रहे हैं | इनसे अलग हुए एक पूर्व विधायक का कहना है कि मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी साधना (गुप्ता)यादव के बेटे प्रतीक यादव व उसकी पत्नी अर्पणा यादव की भी इच्छा सपा में महत्वपूर्ण पद पाने की है। शिवपाल यादव व मुलायम की दूसरी पत्नी के बेटे- बहू को भाजपा स्वागत के लिए तैयार बैठी है। चर्चा है कि इसके लिए कई मध्यस्थों के मार्फत व सीधे भी बातचीत हो रही है। यदि ये आगामी लोकसभा चुनाव में या उसके बाद राज्य विधानसभा चुनाव में अलग पार्टी बनावें तो भाजपा इसके साथ गठबंधन कर सकती है । यदि पार्टी नहीं बनाकर चुनाव लड़ना चाहें, तो भाजपा इन्हें टिकट दे सकती है। इस तरह क्षेत्रीय विपक्षी दलों के नेताओं के पारिवारिक झगड़ों का भाजपा को भरपूर लाभ मिलने की संभावना है।

Updated : 2018-07-27T23:06:27+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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