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सज्जन कुमार का यूं जेल जाना

सज्जन कुमार का यूं जेल जाना
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विशेष संवाददाता

नई दिल्ली। चौरासी के दंगों में कथित भूमिका को लेकर अदालत द्वारा दोषी करार दिए गए कांग्रेस नेता सज्जन कुमार ने सोमवार को कड़कडड़ूमा न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। सज्जन कुमार इस मामले में पहले निचली अदालत में बेकसूर ठहराए गए थे, लेकिन इसे विधाता या विधि का लेख कहें या फिर नियति का खेल। सज्जन कुमार को अपने जीवन के उत्तराद्र्ध में जेल जाना पड़ गया। सज्जन कुमार दिल्ली की राजनीति में लंबे समय तक लोकप्रिय नेता रहे हैं। एक ऐसे स्थापित नेता, जिसके द्वार हर किसी के लिए खुले रहते थे। जब कभी भी मदद की बात की जाती थी, सज्जन कुमार का नाम लोगों की जुबान पर आ ही जाता था। बहरहाल, सिख समुदाय में इस बात को लेकर खुशी है कि लंबे समय बाद ही सही देश की कानून व्यवस्था ने दिखाया कि न्याय में देर है, अंधेर नहीं। सिख समुदाय उस हिन्दुस्तान पर गर्व महसूस कर रहा है, जिसके लिए सिख गुरुओं ने कभी त्याग और बलिदान के इतिहास बनाए थे। पर दिल्ली की सड़कों पर सज्जन कुमार को लेकर कई तरह के सवाल भी लोगों के जेहन मे उठ रहे हैं। क्या कुमार दोषी थे? यह कालचक्र की नियति है। लोगों को मदद की राह दिखाने वाले कैसे दंगों के लिए उकसा सकते थे? जो कुछ भी हुआ था, चाहे इंदिरा जी की हत्या या उसके बाद जनसमुदाय विशेष के प्रति उभरे जनाक्रोश। सब दुख:द था। ग्रह चक्र, काल निर्मित ऐसे संयोग जिनमें एक-एक करके हजारों की संख्या में काल के ग्रास बनते चले गए। किसी को दोषी तो बनता ही था, जिनमें एक नाम सज्जन कुमार का भी जुड़ गया।

पांच अशोक रोड पर सज्जन कुमार के निवास पर साल में एक दिन पत्रकारों को इंतजार रहता था। शहर में आमतौर पर जितने भी खास चर्चित पकवान होते हैं, सज्जन कुमार इस पार्टी में पत्रकारों का विशेष ख्याल रखते थे। पत्रकारों की भागम-भाग की दौड़ में इसी बहाने साल में कभी-कभार बिछड़े हुए लोगों से एक मंच पर मिलना-जुलना हो जाता था। वरिष्ठ से लेकर नए पत्रकार एक दूसरे से संबंध स्थापित करते देखे जाते थे। फिर सज्जन कुमार वरिष्ठ पत्रकारों से नए पत्रकारों का परिचय जानते थे। इसमें संख्या पर पाबंदी नहीं होती थी। सज्जन कुमार जितने मीडियाकर्मियों के करीब थे, उतने ही करीब वे कार्यकर्ताओं के साथ देखे जाते थे। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को वे नाम लेकर बुलाते थे। इससे कार्यकर्ताओं में एक तरह का लगाव हो जाता है। यह कला सज्जन कुमार ने राजीव गांधी से समझी और सीखी थी। सज्जन कुमार अदालत के आदेश का पालन करते हुए फिलहाल जेल पहुंच गए हैं लेकिन उन्हें अभी भी न्याय मिलने का भरोसा है। इसके लिए वे उच्च्तम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की बात कह रहे हैं।

Updated : 2019-01-05T15:13:43+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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