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मप्र: आठ माह में नाबालिगों से दुष्कर्म के 13 मामलों में दी गई फांसी की सजा

दुष्कर्म के मामले में नम्बर वन का तमगा, तो पीड़ितों को न्याय दिलाने में भी सबसे आगे

मप्र: आठ माह में नाबालिगों से दुष्कर्म के 13 मामलों में दी गई फांसी की सजा
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भोपाल। राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के रिकार्ड के अनुसार दुष्कर्म के मामले में मध्यप्रदेश देश में अव्वल नम्बर है, तो वहीं अब मध्यप्रदेश में दुष्कर्म पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने के मामले में सुर्खियां बटोर रहा है। पिछले आठ महीने में मध्यप्रदेश में नाबालिग बच्चियों के साथ दुष्कर्म के 13 मामलों में दोषियों को विभिन्न अदालतों द्वारा फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। इतने कम समय में नाबालिग बच्चियों के दुष्कर्मियों को सजा सुनाने के मामले में मध्यप्रदेश सबसे आगे है। बता दें कि मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है, जहां सरकार ने कानून बनाकर 12 साल के कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वालों को फांसी की सजा देने का प्रावधान किया था और इसका प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था।

मंगलवार को मंदसौर दुष्कर्म मामले में पॉस्को एक्ट की विशेष फास्ट ट्रेक अदालत ने महज एक महीने नौ दिन में दोनों दुष्कर्मियों को फांसी की सजा सुना दी। गत 26 जून को मंदसौर में आठ साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ था। 27 जून को मामला उजागर होने के बाद पुलिस ने त्वरित गति से दोनों आरोपियों आसिफ और इरफान को गिरफ्तार कर सभी पुख्ता सबूत जुटाकर 12 जुलाई को अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। विशेष न्यायाधीश नीशा गुप्ता ने मामले की त्वरित गति से सुनवाई निपाटते हुए एक महीने और नौ दिन में अपना फैसला सुना दिया।

विगत आठ माह में नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म के कुल 13 मामलों में अदालतों ने त्वरित रूप से सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुना दिया। इसमें सबसे पहला मामला शहडोल जिले का है, जहां एक चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में जिला अदालत ने 28 फरवरी 2018 को आरोपित को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। दूसरा मामला इंदौर का है, जहां 27 अप्रैल 2018 को चार माह की दुधमुंही बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में विशेष अदालत ने 12 मई 2018 को अपना फैसला सुना दिया। इसके बाद धार जिले में एक चार साल की बच्ची से दुष्कर्म कर हत्या के मामले में 17 मई 2018 को अदालत का फैसला आया। वहीं, सागर जिले के रहली में नौ साल की बच्ची के साथ 13 अप्रैल 2018 को दुष्कर्म हुआ था। इस मामले का फैसला 19 जून 2018 को सुना दिया गया, जबकि सागर जिले में ही 19 जून 2018 को एक सात साल की बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में जिला अदालत ने महज 19 दिन में 07 जुलाई 2018 को अपना फैसला सुनाया।

इसी प्रकार, कटनी में एक ऑटो ड्राइवर द्वारा गत चार जुलाई 2018 को पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था। इस मामले का फैसला 27 जुलाई 2018 को सुना दिया गया। ग्वालियर में छह साल की बच्ची के साथ 14 जुलाई 2018 को एक शादी समारोह में दुष्कर्म हुआ था, इसका फैसला भी 27 जुलाई को आया, छतरपुर में दो साल की बच्ची से 24 अप्रैल 2018 को दुष्कर्म हुआ था, जिसका फैसला 6 अगस्त को हुआ। दतिया में दो अप्रैल 2018 को एक बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले का फैसला 13 अगस्त को सुनाया गया। सागर में 18 जुलाई 2018 को 10 साल की बच्ची से घर में ही दुष्कर्म के मामले का फैसला 18 अगस्त को सुनाया गया। वहीं, बुरहानपुर में 19 मई को हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले में 16 अगस्त को तथा सागर में एक बच्ची से दुष्कर्म कर उसे जिंदा जलाने के मामले में 20 अगस्त को फैसला सुनाया गया। अब मंगलवार, 21 अगस्त को मंदसौर दुष्कर्म मामले का भी फैसला आ गया। सभी मामलों में दुष्कर्मियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। हालांकि, अभी किसी को फांसी पर नहीं लटकाया गया है, लेकिन दुष्कर्म पीडि़त बालिकाओं को त्वरित न्याय दिलाने के मामले में मध्यप्रदेश देश में सबसे आगे पहुंच गया है।

उपरोक्त सभी ज्यादती के मामलों में पुलिस ने भी अपनी तत्परता दिखाई और जांच को जल्द से जल्द अपने अंजाम तक पहुंचाते हुए सबूतों के साथ अदालतों में चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद अदालतों ने सुनवाई प्रक्रिया को तेज रखते हुए त्वरित फैसले सुनाए। इतनी तेज गति से अब तक किसी अन्य राज्य में दुष्कर्म के मामलों में इतने फैसले नहीं हुए हैं। कटनी में घटना में 13 दिन के अंदर पीडि़त बच्ची को न्याय दिया गया था। इस मामले की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए अपने भाषण में सराहना की थी।

ऐसी हैवानियत की सजा सिर्फ फांसी: गृह मंत्री

दुष्कर्म के मामलों में त्वरित न्याय आने के बाद प्रदेश के गृह मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने अदालत की कार्यप्रणाली, पुलिसकर्मियों की सक्रियता की तारीफ करते हुए मंगलवार को ट्वीट किया है कि हैवानियत की सजा सिर्फ फांसी है और राज्य सरकार ऐसे हैवानों को फांसी की सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। बलात्कार और पॉक्सो एक्ट के मामलों में न्यायालयों ने घटना के कुछ ही महीनों के भीतर सुनवाई खत्म कर मृत्युदंड की सजा दी है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंदसौर दुष्कर्म मामले का फैसला आने के बाद ट्वीट करते हुए कहा कि वास्तव में इन नरपिशाचों के लिए इस दुनिया में कोई जगह नहीं है। ऐसे मामलों में फांसी की सजा से कम कुछ भी नहीं होना चाहिए। बेटी को न्याय दिलाने के लिए पुलिस, लोक अभियोजक, विशेषज्ञों की टीम ने सराहनीय कार्य किया है।

Updated : 2018-08-22T21:25:01+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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