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राफेल पुनर्विचार याचिका : चार मई तक जवाब दाखिल करे केन्द्र, अगली सुनवाई 6 मई को

राफेल पुनर्विचार याचिका : चार मई तक जवाब दाखिल करे केन्द्र, अगली सुनवाई 6 मई को
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नई दिल्ली। राफेल मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई टाल दी है। सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुनवाई टालने की मांग करते हुए कहा कि कोर्ट ने रिव्यू पिटीशन पर खुली अदालत में सुनवाई की बात कही है लेकिन सरकार को नोटिस जारी नहीं किया। इसलिए जवाब दाखिल नहीं हो पाया। तब चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि ठीक है हम नोटिस जारी कर रहे हैं। आप चार मई तक जवाब दाखिल कीजिए। इस मामले पर अगली सुनवाई छह मई को होगी।

बीते दिन 29 अप्रैल को केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अतिरिक्त हलफनामा दायर करने की अनुमति मांगी थी। केन्द्र सरकार ने मामले की 30 अप्रैल को होने ववाई को टालने की भी मांग की थी लेकिन चीफ जस्टिस ने सुनवाई टालने से इनकार कर दिया।

पिछले 10 अप्रैल को कोर्ट ने राफेल मामले पर लीक दस्तावेजों को साक्ष्य के तौर पर पेश करने के खिलाफ दायर केन्द्र सरकार की याचिका को खारिज कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर विस्तार से सुनवाई करेगा।

मामले पर सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने जो दस्तावेज लगाए हैं वे प्रिविलेज्ड हैं और उन्हें भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 123 के तहत साक्ष्य के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता है। जबकि याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने कहा था कि सरकार की चिंता राष्ट्रीय सुरक्षा नहीं है बल्कि सरकारी अधिकारियों को बचाने की है, जिन्होंने राफेल डील में हस्तक्षेप किया।

सुनवाई के दौरान चीफ याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने कहा था कि अटार्नी जनरल की आपत्तियां सुरक्षा हितों के लिए नहीं हैं। इनमें से सभी दस्तावेज पहले से ही पब्लिक डोमेन में हैं। ऐसे में कोर्ट इस पर संज्ञान कैसे नहीं ले सकती है। प्रशांत भूषण ने कहा था कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 123 के मुताबिक प्रिविलेज का दावा उन दस्तावेजों के लिए नहीं किया जा सकता है, जो पब्लिक डोमेन में हों। ये सभी दस्तावेज पब्लिश हो चुके हैं इसलिए प्रिविलेज का दावा बेबुनियाद है।

Updated : 2019-04-30T18:20:40+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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