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राष्ट्रपति कोविंद ने कहा - मानसून सत्र में हो चर्चा, परिचर्चा और संवाद

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा - मानसून सत्र में हो चर्चा, परिचर्चा और संवाद
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फतेहाबाद। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विश्वास जताते हुए कहा कि देश की लोकसभा के साथ-साथ विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं में आने वाले मॉनसून सत्रों में संविधान के मूलमंत्र चर्चा, परिचर्चा और संवाद को ध्यान में रखते हुए जनता के हितों को सर्वोपरी रखकर निर्णय लिए जाएंगे।

राष्ट्रपति रविवार को फतेहाबाद के नई अनाज मंडी में संत शिरोमणी कबीर दास के 620वें प्रकटोत्सव कार्यक्रम को बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, बुंदेलखंड के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों से लोग आए हुए थे। उन्होंने कहा कि आज का कार्यक्रम मॉनसून आने के बाद आयोजित किया जा रहा है और पूरे देश में मॉनसून आ चुका है।

राष्ट्रपति ने हरियाणा सरकार द्वारा लोगों के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं व नीतियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि हरियाणा सरकार ने संत कबीर की जयंती हर जिले में मनाने का बहुत ही अच्छा निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा महापुरुषों की भी जयंतियां मनाई जा रही हैं।

लिंगानुपात सुधार पर हरियाणा सरकार को दी बधाई

राष्ट्रपति ने कहा कि 22 जनवरी,2015 को हरियाणा के पानीपत की धरती से बेटी बचाओ-बेटी पढाओ अभियान की शुरुआत की गई और इस अभियान से पहले बेटियों की संख्या प्रति हजार लड़के काफी कम थी, लेकिन राज्य सरकार के प्रयासों और लोगों के सहयोग से लिंगानुपात में सुधार हुआ है। हरियाणा सरकार की इस सराहनीय सफलता के लिए राज्य सरकार को हार्दिक बधाई देते हैं, जो सराहना के पात्र हैं।

कबीर वाणी में मिलती है समरसता, सरलता तथा न्याय की शिक्षा

कोविंद ने कहा कि संत कबीर दास एक जन के नहीं बल्कि सामान्यजन के थे और उनकी वाणी गरीबों, पीड़ियों के साथ समाज के कमजोर वर्गां के उत्थान के लिए थी। उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में देश के संविधान को तैयार किया गया है, जिसमें कार्यपालिका और विधायिका सक्रिय रहती है। उन्होंने कहा कि कबीर पंत पंत निरपेक्षता का मार्ग है और संविधान भी इसके लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि संत कबीर को किसी पंत, जाति, भाषा इत्यादि ने नहीं बांधा बल्कि उनकी वाणी में समरसता, सरलता के साथ-साथ न्याय की शिक्षा मिलती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि संत कबीर के अलावा महात्मा गांधी, डॉ भीमराव अंबेडकर, दीनदयाल उपाध्याय के साथ-साथ अन्य महापुरुषों ने देश में समरसता, सरलता और ऊंच-नीच व भेदभाव को दूर करने में चेतना जगाने का काम किया। उन्होंने उपस्थित लोगों से संवाद स्थापित करते हुए कहा कि आप सभी को पता है कि कबीर के परिवारजन बुनकर काम करते थे और अपने जीवनयापन के लिए संत कबीर ने भी यह काम किया। उन्होंने कहा कि संत कबीर ने उस समय समाज के ताने-बाने को एक रास्ता देने के लिए गरीब, उपेक्षित और पीड़ित, जो उस समय अपनी पीडा का उल्लेख नहीं कर सकते थे, को एक रास्ता दिखाया और लोग संत कबीर की वाणी सुनने लगे तथा उनके अनुयायी बनने लगे।

रामनाथ कोविंद ने कहा कि संत कबीर एक समाज सुधारक भी थे। उन्होंने जाति-पाति, ऊंच-नीच और उस समय की कुरितियों के साथ-साथ भेदभाव जैसी कुरीति को समाप्त करने के प्रति लोगों में चेतना जगाई। उन्होंने कहा कि संत कबीर की सरलता बहुत ही दुलर्भ है और यह आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा था कि जो सच्चा है उसके दिल में ईश्वर रहता है। उन्होंने कहा कि हमारे समाज की यह विडंबना है कि हमें कुल, जाति, क्षेत्र से जाना जाता है जबकि असल में मानव को गुणों और अवगुणों से पहचाना जाना चाहिए, जिसके गुण श्रेष्ठ हैं, वह महान हो जाता है। उन्होंने कहा कि संत कबीर इतने महान थे कि गुरु नानक देव जी भी अपने पर्वचनों में उनकी वाणी का उल्लेख करते हैं। इसी प्रकार, पश्चिम के कई संतों ने भी संत कबीर का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि संत कबीर की शिक्षा जितनी उनके समय में मान्य थी, उतनी ही आज भी प्रासंगिक है और भविष्य में भी रहेगी।

राष्ट्रपति ने संत कबीर के प्रेमियों व अनुयायियों को इस कार्यक्रम के लिए फतेहाबाद चुनने के लिए बधाई दी और कहा कि इस कार्यक्रम के आयोजक मध्यप्रदेश के पूर्व सांसद नारायण सिंह केसरी ने कहा था कि आपको फतेहाबाद चलना है। जब उन्होंने उनसे पूछा कि हरियाणा में क्यों, मध्यप्रदेश में क्यों नहीं। इस पर नारायण सिंह केसरी ने कहा कि सन्त कबीर का संदेश और वाणी पूरे देश में पहुंचाना चाहते हैं और उन्हें आज इस समृद्धशाली और मेहनती लोगों के क्षे़त्र में आकर खुशी हो रही है। उन्होंने इस कार्यक्रम को कबीर प्रेमियों का महाकुंभ और मिनी इंडिया भी बताया।

भारत और संत का संबंध अटूट है: राज्यपाल

इससे पहले हरियाणा के राज्यपाल प्रो कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि संत कबीर हर सामान्यजन के अंदर बैठे हैं जो उनसे प्रभावित है और उनके दोहे आज भी प्रासंगिक हैं जिनका हमारे जीवन में प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति इस कार्यक्रम में आने के लिए इतने उत्साहित थे कि वे 30 मिनट पहले ही यहां आ गए लेकिन उन्होंने यहां आने के बाद कहा कि 11 बजे का समय है तो वह मंच पर 11 बजे ही जाएंगे। उन्होंने समय प्रबंधन को हमारी विशेषता बताते हुए कहा कि यह भारत की विशेषता है लेकिन कुछ लोग लेट लतीफी होने पर गांधी के नाम को बदनाम करते हैं लेकिन वो हम सबके लिए प्रेरणा थे। उन्होंने कहा कि भारत और संत का संबंध अटूट है। बिना संतों के देश का मार्गदर्शन नहीं हो सकता और यही कारण है कि एक हजार साल के बाद भी हमारी संस्कृति, सभ्यता, पद्धति और पहचान आज 21वीं सदी में भी वैसे ही खड़ी है जैसी पहले थी, जबकि इस दौरान हमारे देश पर कई आक्रमण कर कई लोगों ने हमारे देश के इस ताने-बाने को तोडने की चेष्ठा की है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि आज हमारे देश के योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर मनाया जाने लगा है।

राज्यपाल ने एक भारत-श्रेष्ठ भारत की विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे देश में विविधता में एकता है और यही भारत की विशेषता है।

कृष्ण पंवार ने पढ़ा मुख्यमंत्री का संदेश

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की ओर से प्रतिनिधित्व कर रहे परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने मुख्यमंत्री का संदेश पढ़ा और बताया कि इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को आना था लेकिन उनके पहले से ही कई सरकारी कार्यक्रम थे इसलिए वे मुख्यमंत्री की ओर से यहां प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति से न आने पर क्षमा याचना भी की है और संदेश दिया है कि भविष्य में जब कभी भी राष्ट्रपति हरियाणा के दौरे पर आएंगे तो वे स्वयं उनके स्वागत के लिए पहुंचेंगे।

परिवहन मंत्री ने मुख्यमंत्री का संदेश पढ़ते हुए बताया कि उन्हें खुशी हो रही है कि फतेहाबाद में संत कबीर का 620वां प्रकटोत्सव आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संत कबीर का आगमन या जन्म ऐसे समय में हुआ, जब हमारा समाज, रूढिवादिता और अज्ञानता से गसित था और ऐसे समय में संत कबीर अवतार की तरह लोगों के बीच पहंचे और उन्होंने लोगों को व्यावहारिक जीवन शैली जीना सिखाया। इसके अलावा, उन्होंने लोगों को सामाजिक समरसता का भी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार लोंगों के कल्याण पर बल दे रही है और इसी कड़ी में संतों, महापुरुषों के साथ-साथ गुरुओं की जयंतियों को मनाने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

आयोजकों ने राष्ट्रपति-राज्यपाल को किया सम्मानित

इस अवसर पर आयोजकों द्वारा मुख्यातिथि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, राज्यपाल प्रो कप्तान सिंह सोलंकी, परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार, कार्यक्रम के आयोजक दादा नारायाण सिंह केसरी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर संजय जैन व नोरंग गुप्ता द्वारा तैयार किया गया मेगा बल्ड डोनेशन ड्राइव का बैनर का अनावरण तथा डॉ जय नारायण द्वारा लिखित पुस्तक का भी विमोचन राष्ट्रपति व अन्य अतिथियों द्वारा किया गया।

Updated : 2018-07-15T21:49:32+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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