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निर्भया के माता-पिता पहुंचे कोर्ट, नया डेथ वारंट जारी करने की मांग

निर्भया के माता-पिता पहुंचे कोर्ट, नया डेथ वारंट जारी करने की मांग

नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप और हत्या के मामले में चारों दोषियों के खिलाफ नया डेथ वारंट जारी करने के लिए पीड़िता के माता-पिता और दिल्ली सरकार ने निचली अदालत का रुख किया है। कोर्ट ने इस मामले में भी दोषियों के खिलाफ नोटिस जारी कर दिया है और बुधवार को इस मामले में सुनवाई करेगा। आपको बता दें कि इससे पहले सात फरवरी को निचली अदालत ने तिहाड़ जेल प्रशासन की याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें दोषियों को फांसी देने के लिए नई तारीख की मांग की गई थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धमेंद्र राणा ने दिल्ली हाईकोर्ट के पांच फरवरी के उस आदेश पर गौर किया, जिसमें चारों दोषियों को एक सप्ताह के भीतर कानूनी उपचार का उपयोग करने की अनुमति दी गई थी।

कोर्ट ने कहा, 'जब दोषियों को कानून जीवित रहने की इजाजत देता है, तब उन्हें फांसी पर चढ़ाना पाप है।' कोर्ट ने कहा था कि न्यायाधीश ने कहा, 'मैं दोषियों के वकील की इस दलील से सहमत हूं कि महज संदेह और अटकलबाजी के आधार पर मौत के वांरट को तामील नहीं किया जा सकता है। इस तरह, यह याचिका खारिज की जाती है। जब भी जरूरी हो तो सरकार उपयुक्त अर्जी देने के लिए स्वतंत्र है।'

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निर्भया कांड के चारों दोषियों को नोटिस जारी कर केंद्र की अपील पर जवाब मांगा। केंद्र ने मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय की फांसी पर रोक के खिलाफ दायर अपनी याचिका खारिज करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है।

केंद्र और दिल्ली सरकार की तरफ से न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण व न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ के समक्ष पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, 'दोषियों को खुशी के लिए फांसी नहीं दी जा रही है। प्राधिकारी सिर्फ कानून के आदेश पर अमल कर रहे हैं।' उन्होंने फांसी टालने के लिए दोषियों की ओर से अपनाए जा रहे हथकंडों का भी जिक्र किया। मेहता ने कहा कि तीन दोषियों ने अपने पास उपलब्ध विभिन्न कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर लिया है। वहीं, एक दोषी पवन गुप्ता ने अभी न तो शीर्ष अदालत में सुधारात्मक याचिका दाखिल की है, न ही राष्ट्रपति के सामने दया अर्जी लगाई है।

सॉलिसीटर जनरल ने कहा कि अदालत को फांसी पर अमल में देरी से समाज पर पड़ने वाले असर के बारे में भी विचार करना होगा। 2017 में उच्चतम न्यायालय में सभी दोषियों की अपील खारिज होने के बावजूद प्राधिकारी उन्हें फांसी पर नहीं लटका पाए हैं। उन्होंने हैदराबाद में महिला पशुचिकित्सक से गैंगरेप और हत्या के आरोपियों के कथित एनकाउंटर का उल्लेख किया। मेहता ने कहा, 'दुष्कर्म के आरोपियों का एनकाउंटर होता है तो जनता खुशी मनाती है। हम एनकाउंटर का समर्थन नहीं करते, लेकिन इससे एक बात सामने आती है कि न्यायिक प्रणाली में लोगों का भरोसा घट रहा है।'

मेहता ने चारों दोषियों को एक साथ के बजाय अलग-अलग फांसी पर लटकाने की इजाजत देने की मांग की। इस पर पीठ ने कहा, 'अगर हम केंद्र के इस पहलू पर विचार करेंगे तो मामले में और देरी होगी। अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की जाएंगी। इससे बेहतर होगा कि प्राधिकारी निचली अदालत में जाएं और फांसी के लिए नई तारीख जारी करने की मांग करें।' पीठ ने स्पष्ट किया कि केंद्र की याचिका का लंबित होना निचली अदालत के लिए नई तारीख निर्धारित करने में बाधक नहीं बनेगा।

निर्भया कांड के चार दोषियों में से एक विनय शर्मा ने दया याचिका खारिज करने के राष्ट्रपति के फैसले को मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। वकील एपी सिंह के माध्यम से दाखिल याचिका में विनय ने अपनी मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने का अनुरोध भी किया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एक फरवरी को विनय की दया याचिका खारिज कर दी थी। निर्भया कांड के चारों दोषियों की फांसी पर फिलहाल अभी रोक है। चारों दोषी अभी तिहाड़ जेल में बंद हैं।

Updated : 11 Feb 2020 11:30 AM GMT
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Swadesh Digital ( 0 )

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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