Top
Home > Lead Story > मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामला : सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को लगाई फटकार

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामला : सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को लगाई फटकार

अदालत ने कहा कि आप बिना जांच-पड़ताल के कैसे शेल्टर होम को इतने सालों से फंड दे रहे थे

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामला : सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को लगाई फटकार
X

नई दिल्ली। मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में बच्चियों से रेप के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि बिना जांच-पड़ताल के कैसे शेल्टर होम को इतने सालों से फंड दे रहे थे? सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया कि सालों बाद 2017 में सोशल ऑडिट हुआ। लेकिन ऑडिट करने वाले वहां के स्टाफ से बात कर निकल गए। बच्चियों से बात ही नहीं की।

एमिकस क्यूरी अर्पणा भट्ट ने अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा कि एक बच्ची लापता है। 40- 41 बच्चों को वहां से निकाला जा चुका है। तब जस्टिस मदन बी लोकुर ने पूछा कि बिहार सरकार ने क्या करवाई की? जो अफसर लापरवाही बरत रहे थे, उनका क्या किया । इस पर बिहार सरकर ने कहा कि अच्छे और बुरे अधिकारी हर जगह होते हैं। हमने समय समय पर शेल्टर होम का ऑडिट और वहां पर जांच भी कराई थी। मगर उस दौरान किसी ने उन्हें ऐसी जानकारी नहीं दी। इस पर एमिकस क्यूरी ने कहा कि अगर शेल्टर होम में बच्चों से अधिकारियों ने बात की होती तो बच्चे बताते की उन पर क्या बीत रही है। मगर किसी ने शेल्टर होम में जाकर बच्चों से बात ही नहीं कि। शेल्टर होम का सरकारी निरीक्षण केवल खानापूर्ति थी। कभी कोई सोशल ऑडिट हुआ ही नहीं हुआ।

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से पूछा कि एनजीओ को पैसा बिना किसी उचित जांच के दिया गया था, उनकी विश्वनीयता की जांच हुई? कब से पैसा दिया जा रहा है। साल 2004 से आप पैसा दे रहे है, वो भी बिना पड़ताल किये? क्या पीड़ित लड़कियों की काउंसलिंग की गई? सिर्फ एक होम का मामला नहीं है| ऐसे 15 होम हैं। तब बिहार सरकार ने कहा कि सब पर एक्शन लिया गया है, गिरफ्तारी हुई है। जस्टिस लोकुर ने कहा कि रोजाना लड़कियों से बलात्कार हो रहे हैं| कभी उत्तर में, कभी दक्षिण में कभी मध्य में। ऐसी घटनाएं रोजाना सुनने को मिल रही हैं। बिहार सरकार ऐसा होने ही क्यों दे रही है? देश में आखिर हो क्या रहा है? सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल क्राईम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बलात्कार के मामलों को देखे तो मध्यप्रदेश नंबर वन है और यूपी नंबर 2 पर आता है। आखिरकार ये देश में क्या हो रहा है? इन्हें रोका क्यों नहीं जा रहा?

पिछले 2 अगस्त को इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को रेप पीड़िता बच्चियों के फोटो यहां तक कि चेहरा ढंककर भी नहीं दिखाने का निर्देश जारी किया है।

इस मामले की सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है। अभी तक की मेडिकल जांच में 34 बच्चियों के साथ रेप की पुष्टि हो चुकी है। कुछ रेप पीड़ितों ने कोर्ट को बताया था कि उन्हें नशीले पदार्थ दिए जाते थे और उनके साथ मारपीट की जाती थी। उसके बाद उनके साथ रेप किया जाता था। कई रेप पीड़ित बच्चियों को पेट में दर्द रहता था और कई सुबह में अपने को निर्वस्त्र पाती थीं।

इस घटना के प्रकाश में आने के बाद बिहार में सियासी भूचाल आ गया है। आज ही राज्य के वामदलों ने बिहार बंद का आह्वान किया है। इस मामले में एक पत्रकार और एनजीओ के संचालक ब्रजेश ठाकुर को गिरफ्तार किया गया है।

Updated : 2018-08-07T21:16:59+05:30
Tags:    

Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


Next Story
Share it
Top