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उपराष्ट्रपति गुरुवार को रांची में करेंगे वैचारिक अनुष्ठान 'लोकमंथन' का उद्घाटन

चार दिन तक चलेगा वैचारिक अनुष्ठान, प्रज्ञा प्रवाह कर रहा आयोजन

उपराष्ट्रपति गुरुवार को रांची में करेंगे वैचारिक अनुष्ठान लोकमंथन का उद्घाटन
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रांची/स्वदेश वेब डेस्क। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडु 27 सितम्बर को प्रज्ञा प्रवाह और झारखंड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में आयोजित चार दिवसीय वैचारिक अनुष्ठान 'लोकमंथन-2018' का उद्घाटन करेंगे। समारोह में सभी विचारधाराओं के लोग शामिल होंगे और झारखंड की पांच विशेष लोक प्रस्तुति भी होंगी।

यह जानकारी प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंदकुमार ने संवाददाता सम्मेलन में दी। उन्होंने कहा कि रांची में आयोजित होने वाला यह लोकमंथन का दूसरा संस्करण होगा। पहला संस्करण 2016 में भोपाल में हुआ था। लोकमंथन यानि राष्ट्र सर्वोपरि विचारक एवं कर्मशीलों का एक मंच है। इस प्रयास के माध्यम से एक बार फिर से भारत के सृजनात्मक, रचनात्मक विचार परम्परा को पुनर्जीवित करने का प्रयास करते हैं।

उन्होंने कहा कि देश की सभी विधाओं के श्रेष्ठ लोगों को एक मंच पर लाना, यही हमारा प्रयत्न है। विश्व भारत के बारे में क्या सोचता है और भारत विश्व के बारे में क्या सोचता है इस मंथन में इसकी प्रस्तुति होगी। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में केवल लोक कलाओं का अवलोकन ही नहीं होगा, वहां पर एक सार्थक चर्चा भी रखी गई है।

राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने कहा कि यह राष्ट्रवादी कलाकारों, चिंतकों, साहित्यकारों जो भारत को अपने जीवन में सबसे आगे और महत्वपूर्ण रखते हैं उनको एक मंच पर लाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि लोकमंथन के कार्यक्रमों को मिले समर्थन से ऐसा लगता है कि देश में फैले हुए रचनाकार, कलाकार, संगीतकार और कर्मशील लोगों में एक आत्मविश्वास जागा है। यह जमीनी स्तर से देश की रचना धर्मिता, देश की प्रयोगधर्मिता में बदलाव की एक प्रक्रिया है।

उन्होंने कहा कि लोकमंथन का उद्देश्य साहित्यकारों, रचनाकारों और कलाकारों को एक विशाल मंच उपलब्ध करवाने का है। जो जमीनी स्तर के हमारे कलाकार हैं, उनको इस कार्यक्रम के माध्यम से अपनी गुणवत्ता दिखाने का मौका दिया जाएगा। सिन्हा ने कहा कि लोकमंथन में सभी विचारधारा के लोग सम्मिलित होंगे| इसमें किसी भी तरह का भेदभाव नहीं है। भारत के विचार को कला और साहित्य के जरिए उजागर करना लोकमंथन का उद्देश्य है। वास्तव में भारत के लोक कलाकार स्वाभिमानी होते हैं| उनको लोकमंथन जैसा बड़ा मंच देना हमारे लिए भी गौरव की बात है।

वरिष्ठ पत्रकार उमेश उपाध्याय ने कहा कि लोकमंथन भारत को भारत की दृष्टि से देखने का एक माध्यम है।


Updated : 2018-09-25T21:30:05+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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