Top
Home > Lead Story > सीजेआई : हर चीज के लिए दायर जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार नहीं की जाएगी

सीजेआई : हर चीज के लिए दायर जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार नहीं की जाएगी

सीजेआई : हर चीज के लिए दायर जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार नहीं की जाएगी
X

नई दिल्ली/स्वदेश वेब डेस्क। नवनियुक्त चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने आज काम संभालते ही साफ कर दिया कि हर चीज के लिए दायर जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि क्या कोर्ट हर चीज की मानिटरिंग कर सकती है। आज चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच में जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसफ शामिल थे।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने पहले दिन की शुरुआत में ही मेशनिंग करने वाले वकील को रोका। उन्होंने कहा कि कोई मेशनिंग नहीं। हम इसके लिए पैरामीटर तय करेंगे। आप याचिका दायर कीजिए वो तय प्रक्रिया से लिस्ट होगी। चीफ जस्टिस के समक्ष जब वकील प्रशांत भूषण ने मेंशन करते हुए कहा कि कुछ रोहिंग्या मुसलमानों को जबरन वापस भेजा जा रहा है तब चीफ जस्टिस ने कहा कि आप याचिका दायर कीजिए, ये लिस्ट की जाएगी।

जस्टिस गोगोई इस पद पर पहुंचने वाले पूर्वोत्‍तर भारत के पहले मुख्‍य न्‍यायाधीश हैं। जस्टिस गोगोई देश के 46वें प्रधान न्‍यायाधीश होंगे और 17 नंवबर 2019 तक उनका कार्यकाल होगा।जस्टिस गोगोई का मुख्य न्यायाधीश के तौर पर करीब 14 महीने का कार्यकाल है। वह 17 नवंबर 2019 तक इस पद पर रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट मे न्यायाधीशों के कुल 31 मंजूर पद हैं जिसमे से अभी 25 न्यायाधीश काम कर रहे हैं। जस्टिस दीपक मिश्रा के सेवानिवृत होने के बाद यह संख्या घट कर 24 रह जाएगी। जस्टिस गोगोई के कार्यकाल में पांच और न्यायाधीश सेवानिवृत होंगे और सुप्रीम कोर्ट की कुल रिक्तियां 11 हो जाएंगी। उच्च न्यायालयों में भी जजों के 427 पद रिक्त हैं।

जस्टिस गोगोई बुधवार को जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ के साथ मुख्य न्यायाधीश की अदालत में मुकदमों की सुनवाई करने बैठेंगे। पहले दिन भले ही उनकी अदालत में सुनवाई के लिए कम मुकदमें लगे हों, लेकिन देश भर की अदालतों में लंबित 2.77 करोड़ मुकदमें नये मुखिया की नयी योजना का इंतजार उनके शपथ लेते ही शुरु कर देंगे। इन मुकदमों में 13.97 लाख मुकदमें वरिष्ठ नागरिकों के हैं और 28.48 लाख मुकदमें महिलाओं ने दाखिल कर रखे हैं। इतना ही नहीं उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट मे लंबित 54000 मुकदमें भी अपने मुखिया की नयी कार्यप्रणाली और शीघ्र मुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।




Updated : 2018-10-04T15:01:44+05:30
Tags:    

Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


Next Story
Share it
Top