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मिस्र का भारत के साथ द्विपक्षीय सहयोग, रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने दोनों देशों ने किया फैसला

रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को और मजबूत करने, और आतंकवाद विरोधी संबंधी सूचना एवं इंटेलिजेंस का आदान-प्रदान बढ़ाने का भी निर्णय लिया

मिस्र का भारत के साथ द्विपक्षीय सहयोग, रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने दोनों देशों ने किया फैसला
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नईदिल्ली/वेब डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि भारत-मिस्र ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 12 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि हमने मिस्र के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का फैसला किया है।

मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी के साथ बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी और उनके प्रतिनिधिमंडल का भारत में स्वागत करते हैं। राष्ट्रपति सीसी कल हमारे गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मुझे खुशी है कि मिस्र की सैन्य टुकड़ी भी परेड में हिस्सा लेगी। यह पूरे भारत के लिए सम्मान और हर्ष का विषय है।


उन्होंने कहा कि भारत और मिस्र विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से हैं। हमारे दोनों देशों के बीच कई हजारों वर्षों का अनवरत नाता रहा है। चार हजार वर्षों से भी पहले, गुजरात के लोथल पोर्ट के माध्यम से मिस्र के साथ व्यापार होता था। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में हमारे द्विपक्षीय संबंध और प्रगाढ़ हुए हैं। इस वर्ष भारत ने अपनी जी-20 अध्यक्षता के दौरान मिस्र को अतिथि देश के रूप आमंत्रित किया है, जो हमारी विशेष मित्रता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने अगले पांच वर्षों में अपने देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 12 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का निर्णय लिया है। हमने मिस्र के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का फैसला किया है। हमने तय किया है कि भारत-मिस्र रणनीतिक साझेदारी के तहत हम राजनीतिक, सुरक्षा, आर्थिक एवं वैज्ञानिक क्षेत्रों में और अधिक व्यापक सहयोग का दीर्घकालिक ढांचा विकसित करेंगे।

उन्होंने कहा कि हमने आज की बैठक में अपने रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को और मजबूत करने, और आतंकवाद विरोधी संबंधी सूचना एवं इंटेलिजेंस का आदान-प्रदान बढ़ाने का भी निर्णय लिया है। मोदी ने कहा कि भारत और मिस्र आतंकवाद को लेकर चिंतित हैं। दोनों देश इस बात पर सहमत हैं कि सीमा पार आतंकवाद को नियंत्रित करने के लिए कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। कोविड प्रकोप के दौरान, हमने दोनों देशों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मिलकर काम किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त अभ्यास प्रशिक्षण और हमारे बीच क्षमता निर्माण में वृद्धि हुई है। हमने कोविड और यूक्रेन संकट के कारण बाधित हुई आपूर्ति श्रृंखला पर भी चर्चा की।

Updated : 2023-02-04T13:28:08+05:30

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