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2030 तक लोगों को स्वच्छ वातावरण मुहैया करवाना सबसे बड़ी चुनौती

भारत अगले साल गांधी जयंती तक खुले में शौच से हो जाएगा मुक्त, 4 दिन चलने वाले इस कार्यक्रम में 68 देश ले रहे हैं हिस्सा

2030 तक लोगों को स्वच्छ वातावरण मुहैया करवाना सबसे बड़ी चुनौती
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नई दिल्ली/स्वदेश वेब डेस्क। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को कहा कि वर्ष 2030 तक पर्याप्त और न्यायसंगत स्वच्छता और स्वच्छता के लिए सार्वभौमिक पहुंच प्राप्त करना दुनिया के कई हिस्सों में एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें अभी से इस दिशा में काम करना होगा।

राष्ट्रपति कोविंद ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय स्वच्छता सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए देश को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्य खुले शौचालय को समाप्त करने के लिए कहता है, इसलिए सुनिश्चित करें कि हर किसी के पास बुनियादी शौचालय की सुविधा हो।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान मौजूदा समय में एक जन आंदोलन बन गया है। असल में स्वच्छ भारत अभियान हमारी स्वतंत्रता आंदोलन की भावना का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि भारत 2 अक्टूबर, 2019 तक पूरी तरह से खुले में शौच से मुक्त हो जाएगा। यह महात्मा गांधी को उनके 150वें जन्मदिन का सबसे अच्छा उपहार होगा।

राष्ट्रपति ने दुनिया के 68 देशों से आए प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए विश्व में अधिक से अधिक संख्या में लोगों को स्वच्छता अभियान से जोड़ने के लिए पांच सूत्री मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करें कि लोग स्वच्छता कार्यक्रमों की योजना, कार्यान्वयन और प्रबंधन का नेतृत्व करें, प्रभावी और कुशल सेवा वितरण के लिए स्मार्ट और किफायती प्रौद्योगिकियों का उपयोग करें।

नई दिल्ली में आज से शुरू हुए महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय स्वच्छता सम्मेलन का समापन दो अक्टूबर को होगा। इसमें विश्व के 68 देशों के करीब 161 प्रतिनिधि और 54 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इस मौके पर केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती, केंद्रीय शहरी व आवास राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी मौजूद थे।

Updated : 2018-09-30T03:01:48+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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