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मॉब लिंचिंग के डर से भिखारियों ने किया ऐसा काम

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बंगाल में बुरा हाल : लगातार हो रही भीड़ की हिंसा से दशत में गरीब, जाएं तो जाएं कहां

कोलकाता। बच्चा चोरी के संदेह में देशभर में अनजान लोगों की हो रही पीट-पीटकर हत्या का डर ऐसा फैला है कि भिखारियों ने अब पश्चिम बंगाल के सुदूर गांवों में भिक्षा मांगनी छोड़ दी है। फेरीवाले और काबुलीवाले के भी मन में ऐसा डर बैठा है कि अपना अपना काम छोड़कर दो जून की रोटी के लिए दैनिक मजदूरी करने लगे हैं। इसे लेकर सबसे ज्यादा डर जलपाईगुड़ी जिले के धूपगुड़ी ब्लॉक में फैला है। इस इलाके में एक महीने के अंदर छह लोगों को मॉब लिंचिंग का शिकार होना पड़ा है। लोगों की भीड़ ने महीने के मध्य में एक मानसिक विक्षिप्त महिला, तीसरे सप्ताह में तीन अन्य महिलाओं और सप्ताह के अंत में असम के दो युवकों को हिंसा का शिकार बनाया। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है लेकिन अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। अब आलम ऐसा है कि इलाके में न तो फेरीवाले आ रहे हैं, न ही काबुलीवाले और न ही भिखारी। धुपगुड़ी ब्लॉक में स्थित रेलवे स्टेशन पर जीवन बिताने वाले एक भिखारी ने बताया कि दो सप्ताह पहले इलाके में भीख मांगने के लिए निकला था लेकिन कुछ दूर जाने के बाद ही इलाके के लोगों ने पीछा करना शुरू कर दिया था। पहले ऐसा कभी नहीं होता था। एक के बाद एक लोगों की नजरें अपने चारों ओर घूमता देख वह डर गया था और आधे गांव से ही उल्टे पांव वापस लौट आया। 15 दिनों से भीख मांगने की हिम्मत नहीं कर सका है। आसपास के विभिन्न जगहों की फुटपाथों पर शरण लेकर भिक्षाटन से जिंदगी गुजारने वाले बाकियों की भी यही स्थिति है। अब घर-घर जाकर भिक्षा मांगने के बजाय ये सड़कों के चौराहे, रेड लाइट, सार्वजनिक जगह पर जाकर बैठते हैं जहां लोग अपनी मर्जी से इन्हें कुछ दे देते हैं तो गुजारा होता है। भिक्षा मांगकर अपने दो अनाथ बच्चों को पालने वाली एक महिला ने बताया कि अपने बच्चों को भी गोद में लेकर वह इलाके में नहीं जा पा रही है। लोग पूछते हैं, किसका बच्चा है? कहां से आया? उसने कहा कि जान से मारे जाने के डर से इधर उधर बैठकर भिक्षा मांग रही है लेकिन गांव में घुसने की हिम्मत नहीं हो रही।

इलाके में बच्चों के लिए मिठाइयां, बादाम, चनाचूर आदि बेचने वाले एक काबुली वाले ने बताया कि उसने विगत 20 दिनों से इलाके में फेरी नहीं किया। उसने कहा कि उसका अधिकतम सामान बच्चों के लिए ही होता है। कई बार बच्चे बड़ों के साथ सामान खरीदने आते हैं तो कई दफे खुद ही पैसे लेकर दौड़े हुए उसके पास आते थे। जिन इलाकों में वह अक्सर जाता रहा है वहां तो कुछ खास डर नहीं है लेकिन नए इलाकों में जैसे ही घुसता है, इलाके के लोग उस पर नजर रखने लगे हैं। महिलाएं और युवक संदेह की नजर से देखते हैं। कहीं किसी बच्चे को कुछ हो गया तो फिर उसकी जान नहीं बचेगी। इस डर से उसने अपना काम बंद कर स्थानीय लोगों के खेतों में मजदूरी करना शुरू कर दिया है। इन क्षेत्रों में गमछा, साड़ी आदि बेचने वालों का भी यही हाल है। किसी ने मजदूरी शुरू कर दी है तो कोई रिक्शा चलाकर जीवन यापन करने लगा है। इस बारे में पूछने पर जिले के पुलिस अधीक्षक अमिताभ माइती ने कहा कि बच्चा चोरी की अफवाह इस इलाके में काफी तेजी से फैली है। लोग बेहद शंकित और सतर्क हो गए हैं। बावजूद इसके आम लोगों के बीच पुलिस ने जागरूकता अभियान चलाया है और लोगों को इसके लिए तैयार किया है किसी भी तरह से भीड़ की हिंसा को उकसावा नहीं दिया जाए। लोगों को यह बताया गया है कि कानून को हाथ में नहीं लिया जा सकता है। किसी संदिग्ध को इलाके में देखने पर पुलिस को सूचित करने के लिए भी लोगों को तैयार किया गया है। धीरे-धीरे जागरूकता फैल रही है। कुछ दिनों के अंदर हालात सामान्य हो जाएंगे।

Updated : 2018-07-30T18:16:09+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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