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आम्रपाली के फ्लैट खरीददारों को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत

एनबीसीसी को अधूरे प्रोजेक्ट टेकओवर करने का निर्देश

आम्रपाली के फ्लैट खरीददारों को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत
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नई दिल्ली। आम्रपाली के फ्लैट खरीददारों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत की खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन (एनबीसीसी) को आम्रपाली समूह के सभी अधूरे प्रोजेक्ट को टेकओवर करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने एनबीसीसी से एक महीने के भीतर इसके लिए समग्र योजना बनाने का निर्देश दिया । कोर्ट ने एनबीसीसी से पूछा कि इस काम को कितने दिन में पूरा किया जा सकता है।

इस मामले पर सुनवाई के दौरान आज केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाते हुए पूछा कि आपको एनबीसीसी को आमंत्रित करने के लिए किसने अधिकृत किया? मीटिंग में निवेशकों का प्रतिनिधित्व किसने किया? क्या आपको सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश की जानकारी नही? क्या आम्रपाली से आपने रिकॉर्ड तलब किया ।

कोर्ट ने दुर्गा शंकर मिश्रा को फटकार लगाते हुए कहा कि आपने जो किया, वो सीधे तौर पर कोर्ट की अवमानना के दायरे में आता है। आपने और एनबीसीसी के चेयरमैन ने कोर्ट की कार्रवाई में बाधा डाली है । इसके बाद दुर्गा शंकर मिश्रा ने कोर्ट से माफी मांगी। उन्होंने अपनी सफाई देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं थी, उनका मकसद सहायता करना था ।

कोर्ट ने एनबीसीसी द्वारा आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने संबंधी योजना की जानकारी मीडिया को विज्ञापन के जरिए देने की आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि जब मामला कोर्ट में लंबित है तो आपने ये विज्ञापन कैसे दे दिया। सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली के वकील से पूछा कि हम आप पर विश्वास कैसे करें ? आप कोर्ट का आदेश नहीं मान रहे हैं। न बिजली, न पानी, न लिफ्ट । आपको पता नहीं कि आप किस मुसीबत में हैं।

एक अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली की सभी कंपनियों और निदेशकों के खाते फ्रीज करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने सभी कम्पनियों और निदेशकों की सम्पति भी जब्त करने का आदेश दिया था । कोर्ट ने कहा था कि लगता है कि कोर्ट के साथ गंभीर फ्रॉड खेला जा रहा है। फिलहाल हर कोई हमारे शक के दायरे में है।

कोर्ट ने नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी (एनबीसीसी) के चेयरमैन और केंद्रीय शहरी आवास मंत्रालय के सचिव को भी तलब किया था। कोर्ट ने आम्रपाली के प्रोजेक्ट टेकओवर करने को लेकर एनबीसीसी के साथ हुई बैठक को भी गुमराह करने की कोशिश करार दिया। कोर्ट ने पूछा था कि जब हम सुनवाई कर रहे हैं तो समानांतर कार्रवाई क्यों शुरू की गई ।

पिछली 18 जुलाई को आम्रपाली समूह ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि केंद्र सरकार उसके प्रोजेक्ट टेकओवर कर सकती है। राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) के साथ शुरुआती बातचीत हुई है। बैठक में नोएडा-ग्रेटर नोएडा के अधिकारी मौजूद थे। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बातचीत के लिए 10 दिन का समय दिया था ।

कोर्ट ने आम्रपाली के प्रमोटर्स को देश नहीं छोड़ने का आदेश दिया था। सुनवाई के दौरान एएसजी विक्रमजीत बनर्जी ने कहा कि कोर्ट ये साफ करे कि ये आम्रपाली समूह का प्रस्ताव है कि उसके प्रोजेक्ट्स सरकार ले सकती है। इसे कोर्ट के आदेश के तौर पर नहीं देखा जाए।

17 मई को जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने साफ कहा था कि घर खरीददार तभी भुगतान करेंगे जब प्रोजेक्ट का निर्माण सौ फीसदी हो जाएगा। ये भुगतान पजेसन लेटर मिलने के तीन महीने के बाद किया जाएगा। कोर्ट ने सी वर्ग वाले प्रोजेक्ट्स को दूसरे प्रोजेक्ट्स के साथ बदलने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि जो लोग फ्लैट बदलना नहीं चाहते हैं वे पैसों की वापसी के लिए आवेदन दे सकते हैं।

पहले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली और को-डेवलपर से करोड़ों रुपये साइफन करने का ब्यौरा देने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने सख्त लहजे में पूछा कि रुपया कहाँ से आया और किन कम्पनियों को दिया गया? रकम किस रूप में दी गई, किसी काम के लिए एडवांस या फिर उधारी या किसी अन्य बहाने से। सुनवाई के दौरान फ्लैट खरीदारों की ओर से दलील दी गई थी कि सहारा, यूनिटेक और जेपी की तरह आम्रपाली और इसके निदेशकों की निजी संपत्ति भी अटैच कर दी जाये। इनसे कम से कम 500 करोड़ रुपये जमा कराए जाएं तब ये प्रोजेक्ट पूरे करेंगे।

Updated : 2018-08-03T02:19:44+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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