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निर्मल गंगा : एशिया का सबसे बड़ा सीसामऊ नाला बंद, गंगा में प्रतिदिन गिरता था 2.5 करोड़ लीटर गंदा पानी

- अंग्रेजों के जमाने में 126 वर्ष पूर्व बना था यह नाला

निर्मल गंगा : एशिया का सबसे बड़ा सीसामऊ नाला बंद, गंगा में प्रतिदिन गिरता था 2.5 करोड़ लीटर गंदा पानी
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कानपुर/स्वदेश वेब डेस्क। नमामि गंगे का मंत्रालय संभालते ही केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पवित्र पावन मां गंगा के लिए नासूर बने सीसामऊ नाले को बंद करने का फरमान सुनाया था। नमामि गंगे के प्रोजक्ट के तहत अंग्रेजों के जमाने के 126 साल पुराने एशिया के सबसे बड़े गंदे नाले को बुधवार को टेप (सील्ड) कर दिया गया, जिससे गंगा में प्रतिदिन 2.5 करोड़ लीटर गंदा पानी गिरता था। जिससे अब यह नाला गंगा में गंदगी नहीं फैला सकेगा। हालांकि अभी भी अधिकारी इसकी देखरेख में जुटे हैं कि कहीं से लीकेज तो नहीं हो रहा है और गुरुवार को पूरी रिपोर्ट आ जाएगी।

गौरतलब है कि सरकारें आती और जाती रही पर सीसामऊ नाले को लेकर कभी राजनीति बंद नहीं हुई। हर सरकार एशिया के सबसे बड़े इस गंदे नाले को गंगा में जाने से पहले रोकने की बात करती रही पर यह अनवरत गंगा को दूषित करता रहा। केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी के पास जैसे ही नमामि गंगे का मंत्रालय आया तो इस पर पर काम करने की ठान ली और इसकी उल्टी गिनती शुरू हो गयी। जिसके चलते बुधवार को इस नाले को पूरी तरह से टेप किया जा सका और भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र मैथानी और नगर आयुक्त सन्तोष कुमार शर्मा ने आज ही नाले का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने बताया कि शहर के सभी नालों का निरीक्षण किया जा चुका है। आठ नाले गंगा में जाने से पूरी तरह रोक लिए गए है जबकि अन्य नालों को 15 दिसम्बर तक टैप कर दिया जाएगा या इस दूषित पानी को ट्रीट किया जाएगा। ताकि महाकुंभ में श्रद्धालुओं को गंगा का पानी शुद्ध व निर्मल मिल सके। अभी इस सीसामऊ नाले कार्य की मॉनिटरिंग लगातार की जाएगी ताकि कहीं किसी प्रकार की गड़बड़ी होने पर उसे तत्काल दुरुस्त किया जा सके। वहीं अन्य नालों का गंदा पानी गंगा में न जाकर उस दूषित पानी को बायो रेमिडीएशन के माध्यम से ट्रीट करते हुए भेजा जाएगा। नमामि गंगे के प्रोजेक्ट इंचार्ज घनश्याम तिवारी ने बताया कि नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत प्रोजेक्ट बनाकर प्रयास किया गया और दो भागों में इसे मोड़ा गया। इस नाले से निकलने वाले 140 एमएलडी गंदे पानी में से 80 एमएलडी बिनगवां और 70 एमएलडी पानी जाजमऊ ट्रीटमेंट प्लांट भेजा जा रहा है। यह 9 किलोमीटर तक का सीवर लाइन है जिसे एसटीपी किया जा रहा है। कहा अब गंगा सफाई में काफी ज्यादा फर्क पड़ेगा क्योंकि इस नाले से जितनी गंदगी गंगा में जा रही थी जिससे गंगा दूषित हो रही थी उसको रोकने में सफलता हासिल की है।

इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र मैथानी ने कहा कि यह काम नमामि गंगे के प्रोजेक्ट के तहत चल रहा है जिसमें कानपुर के कई नाले टेप हो चुके हैं और जल्द ही बचे हुए भी गंगा में जाने से रोके जायेंगे। बताते चलें कि कानपुर में 16 ऐसे नाले हैं जो गंगा में सीधे गिरते हैं जिनमें 8 नालों की टेपिंग की जा चुकी है। बाकी बचे नालों की भी टेपिंग का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।

Updated : 2018-12-12T21:25:17+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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