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श्रीलंका मामले पर अमेरिका ने कहा- संविधान के मुताबिक काम करें सभी दल

श्रीलंका मामले पर अमेरिका ने कहा- संविधान के मुताबिक काम करें सभी दल
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वाशिंगटन। अमेरिका ने श्रीलंका के राजनीति संकट पर कड़ी आपत्ति जताते हुए श्रीलंकाई राजनीतिक पार्टियों को संविधान के मुताबिक काम करने की सलाह दी है। श्रीलंका में शुक्रवार को नाटकीय घटनाक्रम के बीच राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर पूर्व राष्ट्रपति 72 वर्षीय महिंदा राजपक्षे को नया प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया।

अमेरिका ने कहा, ''हम उम्मीद करते हैं कि श्रीलंका सरकार मानवाधिकार, सुधार, जवाबदेही, न्याय और सुलह के लिए अपनी जेनेवा प्रतिबद्धताओं को कायम रखेगी।''

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक राजपक्षे को प्रधानमंत्री बनाने के सिरिसेना के कदम से संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है क्योंकि संविधान में 19वां संशोधन बहुमत के बिना विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री पद से हटाने की अनुमति नहीं देता। वहीं, वित्तमंत्री मंगला समरवीरा ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते कहा था कि प्रधानमंत्री के रूप में राजपक्षे की नियुक्ति असंवैधानिक और गैरकानूनी है।

सिरिसेना के राजनीतिक मोर्चे यूनाइटेड पीपुल्स फ्रीडम अलायंस (यूपीएफए) ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि उसने मौजूदा गठबंधन सरकार से समर्थन लेने का फैसला किया है। यह गठबंधन यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के साथ था जिसके नेता रानिल विक्रमसिंघे अब तक प्रधानमंत्री थे। राजपक्षे ने शपथ लेने के बाद सिरिसेना के साथ अपनी एक तस्वीर साझा की थी।

वर्ष 2015 में विक्रमसिंघे के समर्थन से सिरिसेना राष्ट्रपति बने थे। इससे पहले करीब एक दशक तक राजपक्षे की सरकार थी। उनकी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे सिरिसेना ने उनसे अलग होकर राष्ट्रपति चुनाव लड़ा था।

उल्लेखनीय है कि 225 सदस्यीय श्रीलंकाई संसद में विक्रमसिंघे की पार्टी यूएनपी के पास 106 सीटें हैं, जो बहुमत से सिर्फ सात कम हैं। जबकि, राजपक्षे और सिरिसेना की कुल 95 सीटें हैं।

गौरतलब है कि राजपक्षे को सिरीसेना ने पिछले राष्ट्रपति चुनावों में सीधी टक्कर में हराया था। अपने विरोधी को अपनी ही सरकार का प्रधानमंत्री बनाकर सिरीसेना ने सबको चौंका दिया है। आर्थिक नीतियों और रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज को लेकर सिरीसेना और विक्रमासिंघे के बीच मतभेद थे। विक्रमसिंघे की यूएनपी 2015 से गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रही थी। इससे पहले यूएनपी ने कहा था कि राष्ट्रपति के पास प्रधानमंत्री विक्रमासिंघे को हटाने का कोई अधिकार नहीं है।

डॉ. स्वामी ने दी राजपक्षे को बधाई

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने शुक्रवार शाम को ट्वीट किया, "मेरे दोस्त महिंदा राजपक्षे को अभी-अभी श्रीलंका के प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई है।" उन्होंने एक और ट्वीट किया, "मैं अब मालदीव और अफ़ग़ानिस्तान पर काम करूंगा।"

Updated : 2018-10-27T20:30:31+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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