अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में बढ़ते तनाव के चलते सैन्य कार्रवाई का खतरा बढ़ गया है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर अविश्वास की बात कही है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक बातचीत के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दोनों देशों के बीच चल रही वार्ता विफल होती है तो अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का विकल्प अपना सकता है। दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका पर अविश्वास जताते हुए कहा है कि वह किसी भी समझौते को लेकर जल्दबाजी नहीं करेगा।यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के प्रतिनिधि अप्रैल में लागू हुए अस्थायी युद्धविराम को आगे बढ़ाने और एक व्यापक समझौते की दिशा में बातचीत कर रहे हैं।
ट्रम्प बोले- समझौते की जल्दबाजी नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि उन्हें ईरान के साथ समझौता करने की कोई जल्दबाजी नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक "बेहतरीन समझौता" चाहता है, लेकिन यदि ऐसा संभव नहीं हुआ तो सैन्य विकल्प भी खुला रहेगा। ट्रम्प के अनुसार, समझौता होने की स्थिति में होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को तत्काल सामान्य रूप से खोला जा सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव में कमी आएगी।
व्हाइट हाउस की बैठक में नहीं हुआ अंतिम फैसला
सूत्रों के अनुसार ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में शीर्ष अधिकारियों के साथ लगभग दो घंटे तक बैठक की। हालांकि इस बैठक में ईरान को लेकर किसी अंतिम प्रस्ताव पर निर्णय नहीं हो सका और फैसला फिलहाल टाल दिया गया। यह स्थिति दर्शाती है कि अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी आगे की रणनीति को लेकर विचार-विमर्श जारी है।
ईरान का जवाब- पहले अमेरिका भरोसा दिखाए
ईरान की ओर से मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि तेहरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जब तक अमेरिका अपने वादों पर अमल नहीं करता, तब तक ईरान भी कोई नया कदम नहीं उठाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान किसी प्रकार के समझौते को लेकर जल्दबाजी में नहीं है।