डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान का नया शांति प्रस्ताव ठुकरा दिया। अमेरिका ने 440 किलो एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने की शर्त रखी, जबकि होर्मुज संकट से तेल बाजार में हलचल बढ़ गई।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के नए शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ट्रम्प ने साफ कहा कि उन्हें ईरान की प्रतिक्रिया “बिल्कुल पसंद नहीं आई” और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ गया है।
ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को युद्ध खत्म करने और प्रतिबंध हटाने का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन अमेरिका ने जवाब में सख्त शर्तें रखीं, जिनमें 12 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकना और करीब 440 किलो हाईली एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंपना शामिल है। इस घटनाक्रम के बाद तेल बाजार, होर्मुज स्ट्रेट और खाड़ी देशों में सुरक्षा चिंता बढ़ गई है।
अमेरिका ने ईरान के सामने क्या शर्तें रखीं?
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने ईरान को 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा था। इसमें कहा गया कि ईरान को कम से कम 12 साल तक यूरेनियम संवर्धन बंद करना होगा।इसके अलावा ईरान के पास मौजूद 60% तक एनरिच्ड करीब 440 किलो यूरेनियम अमेरिका को सौंपने की शर्त भी रखी गई। बदले में अमेरिका प्रतिबंधों में राहत, फ्रीज की गई संपत्तियों की रिहाई और नौसैनिक नाकेबंदी हटाने पर विचार कर सकता है।हालांकि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह समझौते के लिए तैयार नहीं दिख रहा। तेहरान का कहना है कि उसका जवाब “सकारात्मक और व्यावहारिक” था।
ट्रम्प ने क्या कहा?
ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि उन्होंने ईरान के प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा, लेकिन वह उन्हें स्वीकार्य नहीं लगा। इससे पहले भी ट्रम्प ईरान पर “खेल खेलने” का आरोप लगा चुके हैं। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि ईरान बातचीत के जरिए समय हासिल करना चाहता है, जबकि परमाणु गतिविधियां जारी रखना चाहता है।
होर्मुज स्ट्रेट बना दुनिया की चिंता
तनाव का सबसे बड़ा असर होर्मुज स्ट्रेट पर दिख रहा है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ने के बाद कई जहाजों ने अपना रास्ता बदल दिया। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका, फ्रांस या ब्रिटेन ने होर्मुज में सैन्य दखल बढ़ाया तो उसका जवाब दिया जाएगा। साथ ही ईरान ने उन देशों को भी चेतावनी दी है जो अमेरिकी प्रतिबंधों का समर्थन कर रहे हैं।
तेल की कीमतें 104 डॉलर के पार पहुंचीं
ईरान के प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में हालात और बिगड़े तो दुनिया भर में ईंधन कीमतों पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव भारत समेत तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
लेबनान और खाड़ी देशों में भी बढ़ा तनाव
दक्षिणी लेबनान में इजराइली हमले तेज हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक हाल के महीनों में बड़ी संख्या में मेडिकल कर्मियों की मौत हुई है। वहीं UAE, कुवैत और कतर जैसे खाड़ी देशों में भी सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कतर के पास एक मालवाहक जहाज पर हमला हुआ, जबकि UAE ने दो ईरानी ड्रोन मार गिराने का दावा किया है।
अमेरिका में भी छिड़ी राजनीतिक बहस
अमेरिका में ईरान युद्ध को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क केली ने दावा किया कि युद्ध के कारण अमेरिकी हथियारों का भंडार तेजी से कम हुआ है। हालांकि अमेरिकी रक्षामंत्री पीट हेगसेथ ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका की सैन्य क्षमता मजबूत है और गलत जानकारी फैलाई जा रही है। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव, परमाणु समझौते पर गतिरोध और तेल संकट के बीच अब दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है।