होर्मुज में अमेरिकी मिशन ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ अचानक रोक दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी अरब ने एयरबेस और हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई, जिसके बाद ट्रंप पीछे हटे।
मिडिल ईस्ट में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका को बड़ा रणनीतिक झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना चर्चित ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ अचानक रोकना पड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फैसले के पीछे सऊदी अरब का दबाव बड़ी वजह बना। बताया जा रहा है कि सऊदी ने अमेरिकी विमानों को अपने एयरबेस और हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया। यानी जिस सैन्य अभियान को ट्रंप ने ताकत दिखाने के तौर पर पेश किया था, वही कुछ घंटों में कूटनीतिक संकट में बदल गया।
क्या था ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’?
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ की घोषणा करते हुए कहा था कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा। दरअसल हाल के दिनों में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद यह आशंका पैदा हो गई थी कि होर्मुज में समुद्री रास्ता बाधित हो सकता है। अमेरिका इसे वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई के लिए बड़ा खतरा मान रहा था। इसी वजह से सैन्य अभियान की तैयारी शुरू की गई।
सऊदी अरब ने अचानक विरोध क्यों किया?
एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब अमेरिकी सैन्य विमानों को प्रिंस सुल्तान एयरबेस से ऑपरेशन चलाने की अनुमति देने के पक्ष में नहीं था। सऊदी नेतृत्व को डर था कि अगर अमेरिका ने सीधे सैन्य दबाव बढ़ाया, तो ईरान की प्रतिक्रिया पूरे खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर कर सकती है। तेल बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा को देखते हुए सऊदी अरब खुली सैन्य कार्रवाई से दूरी बनाना चाहता था। यही वजह रही कि उसने अमेरिकी योजना पर असहमति जता दी।
क्या ट्रंप और मोहम्मद बिन सलमान के बीच खटास
रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच फोन पर लंबी बातचीत हुई, लेकिन दोनों पक्ष किसी साझा समाधान पर नहीं पहुंच सके। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन को ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ अस्थायी रूप से रोकने का फैसला लेना पड़ा। सूत्रों का कहना है कि खाड़ी के कई दूसरे सहयोगी देश भी इस घोषणा से चौंक गए थे, क्योंकि उन्हें पहले से पूरी जानकारी नहीं दी गई थी।
होर्मुज बना पूरी दुनिया की चिंता
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यहां सैन्य टकराव बढ़ता, तो तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता था। इसका असर सीधे वैश्विक बाजार और आम लोगों तक पहुंचता। यही वजह है कि कतर, ओमान और दूसरे खाड़ी देश लगातार तनाव कम करने और समझौते की कोशिश में जुटे हैं।
अब क्या करेगा अमेरिका
व्हाइट हाउस ने फिलहाल इसे ‘अस्थायी रोक’ बताया है। ट्रंप ने कहा है कि अभियान को कुछ समय के लिए निलंबित किया गया है ताकि संभावित समझौते की संभावना देखी जा सके। हालांकि रणनीतिक जानकार मानते हैं कि बिना क्षेत्रीय सहयोग के अमेरिका के लिए खाड़ी में बड़ा सैन्य अभियान चलाना आसान नहीं होगा।
फिलहाल मिडिल ईस्ट की राजनीति में यह घटनाक्रम साफ संकेत दे रहा है कि अब सिर्फ सैन्य ताकत नहीं, बल्कि क्षेत्रीय साझेदारों की सहमति भी उतनी ही जरूरी हो चुकी है।