डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ जंग खत्म होने का दावा किया, लेकिन तेहरान ने इसे खारिज कर दिया। भारतीय नाविकों की मौत पर भी विवाद गहरा गया।
वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब समाप्त हो चुका है। ट्रम्प ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच समझौता लगभग तय हो गया है और ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने पर सहमति दे दी है। हालांकि तेहरान ने कुछ ही घंटों में इस दावे को खारिज कर दिया और कहा कि अभी किसी अंतिम समझौते पर मुहर नहीं लगी है।
ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भी कहा कि ईरानी नेतृत्व ने प्रस्तावित समझौते को मंजूरी दे दी है और आने वाले दिनों में यूरोप में औपचारिक हस्ताक्षर हो सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी संभावित हस्ताक्षर समारोह में शामिल हो सकते हैं।
तेहरान बोला- अभी कोई अंतिम फैसला नहीं
ट्रम्प के बयान के बाद ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि समझौते को लेकर कई बातें अभी भी विचाराधीन हैं। उनके मुताबिक वार्ता में प्रगति जरूर हुई है, लेकिन किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने का दावा करना जल्दबाजी होगी। ईरान ने यह भी कहा कि वह अपनी रणनीतिक और परमाणु नीति से जुड़े "रेड लाइन्स" से समझौता नहीं करेगा।
24 घंटे में घटनाक्रम ने कई बार बदली दिशा
बीते 24 घंटे में घटनाक्रम तेजी से बदला। एक ओर ट्रम्प ने ईरान के तेल ठिकानों पर बड़े हमले की चेतावनी दी, वहीं कुछ घंटे बाद उन्होंने नए सैन्य हमले रोकने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और समझौता निकट है।
समझौते के बाद भी तीन बड़े विवाद बाकी
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तावित समझौते के बावजूद कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी है। इनमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम का भविष्य, अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने का रोडमैप और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई का तंत्र शामिल है। बताया जा रहा है कि इन विषयों पर अगले दो महीनों तक अलग से बातचीत जारी रह सकती है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान का बड़ा दावा
तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट पर अपना प्रभाव जताया है। ईरानी नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस सामरिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर उनकी निगरानी बनी हुई है और क्षेत्र में उनकी सैन्य क्षमता बरकरार है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में गिना जाता है। इसी कारण यहां होने वाली हर गतिविधि का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ता है।
भारतीय नाविकों की मौत से बढ़ा तनाव
इस पूरे विवाद के बीच भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा भी गंभीर होता जा रहा है। ओमान तट के पास भारतीय क्रू वाले जहाजों पर हुए हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हुई है। इसके बाद भारत सरकार ने अमेरिकी राजनयिक को तलब कर अपनी चिंता दर्ज कराई। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि व्यावसायिक जहाजों पर हो रही सैन्य कार्रवाई को लेकर भारत गंभीर है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों की मौत के बावजूद सरकार की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
युद्ध खत्म करने की जल्दी में ट्रम्प?
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि ट्रम्प पर ईरान संघर्ष को जल्द समाप्त करने का राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। युद्ध का असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और तेल बाजार दोनों पर दिखाई दे रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ट्रम्प किसी बड़े कूटनीतिक समझौते को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश करना चाहते हैं। यही वजह है कि वे लगातार युद्धविराम और समझौते को लेकर आशावादी बयान दे रहे हैं, जबकि ईरान अभी भी अंतिम सहमति से दूरी बनाए हुए है।
दावों और हकीकत के बीच फंसी वार्ता
फिलहाल स्थिति ऐसी है कि वॉशिंगटन समझौते को लगभग तय बता रहा है, जबकि तेहरान इसे अभी अधूरी प्रक्रिया मान रहा है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि दोनों देशों के बीच वास्तव में शांति समझौता होता है या फिर मध्य पूर्व एक बार फिर नए तनाव की ओर बढ़ता है।