अमेरिका ने ईरान के ड्रोन और रडार ठिकानों पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी एयरबेस पर पलटवार किया। इस बीच, ईरानी राष्ट्रपति के इस्तीफे की अफवाहें उठीं।
पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के गोरुक और केश्म द्वीप स्थित रडार एवं ड्रोन कंट्रोल ठिकानों पर हमले किए हैं। इसके जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी सैन्य अभियान में इस्तेमाल हुए एक एयरबेस को निशाना बनाया है। इसी बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान के इस्तीफे की खबरों ने राजनीतिक हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है।
अमेरिकी हमले में रडार और ड्रोन सिस्टम तबाह
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक यह कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की गई। अमेरिका ने आरोप लगाया कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराया था। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और दो ड्रोन को नष्ट कर दिया।अमेरिका का दावा है कि ये ड्रोन समुद्री व्यापारिक मार्गों पर चलने वाले जहाजों के लिए खतरा बन रहे थे।
ईरान का पलटवार, एयरबेस को बनाया निशाना
IRGC ने कहा कि अमेरिकी हमले के लिए इस्तेमाल किए गए एयरबेस पर जवाबी कार्रवाई की गई है। ईरान का दावा है कि यह हमला सीरिक द्वीप के टेलीकॉम टावर पर अमेरिकी हमले के जवाब में किया गया। हालांकि ईरान ने एयरबेस का नाम या स्थान सार्वजनिक नहीं किया है।
राष्ट्रपति के इस्तीफे की खबर पर विवाद
विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने इस्तीफा दे दिया है और उन्होंने देश की सत्ता पर IRGC के बढ़ते प्रभाव पर सवाल उठाए हैं। हालांकि राष्ट्रपति कार्यालय के संचार विभाग ने इन खबरों को पूरी तरह अफवाह बताते हुए खारिज कर दिया है।
लेबनान में भी बढ़ा तनाव
इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के रणनीतिक ब्यूफोर्ट किले और आसपास के इलाकों पर कब्जा कर लिया है। इसे पिछले 26 वर्षों में लेबनान में इजराइल की सबसे बड़ी सैन्य घुसपैठ माना जा रहा है। फ्रांस ने हालात को गंभीर बताते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है।
ट्रम्प बोले- ईरान समझौता चाहता है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देशों के बीच वार्ता का सकारात्मक परिणाम निकल सकता है। वहीं ईरान ने दोहराया है कि उसके अधिकारों और सुरक्षा की गारंटी मिलने तक किसी भी अंतिम समझौते को मंजूरी नहीं दी जाएगी।
होर्मुज और मिसाइल ठिकानों पर बढ़ी गतिविधियां
रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने अपने भूमिगत मिसाइल नेटवर्क के कई सुरंग मार्ग दोबारा सक्रिय कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो क्षेत्र में लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल बढ़ सकता है। दूसरी ओर कुवैत ने भी संभावित मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे को देखते हुए अपने एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया है।