ईरान ने अमेरिका पर भरोसा न होने की बात कहते हुए होर्मुज स्ट्रेट को अपना सबसे बड़ा रणनीतिक हथियार बताया। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा, इजराइल-लेबनान और गाजा में भी हमले तेज।
मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान संभावित नए युद्ध की तैयारी में जुट गया है। तेहरान ने साफ कहा है कि उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है और जरूरत पड़ने पर वह होर्मुज स्ट्रेट को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार ईरानी नेतृत्व तीन स्तरों पर तैयारी कर रहा है सैन्य मोर्चा, घरेलू समर्थन और कूटनीतिक रणनीति। हालांकि बातचीत के रास्ते खुले रखे गए हैं, लेकिन ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को हाई अलर्ट पर रखा गया है।दुनिया के बड़े हिस्से की तेल सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। ऐसे में ईरान इसे अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाने के सबसे प्रभावी हथियार के रूप में देख रहा है। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि नया संघर्ष शुरू होता है तो अमेरिकी सैन्य ठिकानों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है।कुछ दिन पहले IRGC ने चेतावनी दी थी कि किसी भी अमेरिकी हमले का जवाब पहले से ज्यादा आक्रामक होगा और उसका असर पूरे मिडिल ईस्ट से बाहर तक महसूस किया जाएगा।
पिछले 24 घंटे के बड़े घटनाक्रम
अमेरिकी ड्रोन मार गिराने का दावा
ईरान ने दावा किया कि उसकी सैन्य फोर्स ने अमेरिकी MQ-9B और RQ-4 ड्रोन को निशाना बनाया। साथ ही ईरानी एयरस्पेस में घुसे F-35 फाइटर जेट पर भी फायरिंग की गई।
88 दिन बाद इंटरनेट सेवा आंशिक बहाल
ईरान में करीब 88 दिन बाद इंटरनेट सेवाएं आंशिक रूप से बहाल हुईं। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था नेटब्लॉक्स ने इसे आधुनिक इतिहास का सबसे लंबा राष्ट्रीय इंटरनेट ब्लैकआउट बताया। इस लंबे प्रतिबंध का असर कारोबार, बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं पर पड़ा।
नेतन्याहू की सुरक्षा बैठक
इजराइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने रक्षा अधिकारियों के साथ हाई लेवल बैठक की। बैठक में उत्तरी सीमा और लेबनान की स्थिति पर चर्चा हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले भी तेज किए गए हैं।
होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी कार्रवाई
अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास बारूदी सुरंग बिछाने की आशंका वाली ईरानी बोट्स और बंदर अब्बास के मिसाइल ठिकानों पर कार्रवाई की। अमेरिकी सेंटकॉम ने इसे आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया।
अमेरिका और ईरान के बीच बैकचैनल बातचीत जारी
तनाव और सैन्य गतिविधियों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है। मध्यस्थों के जरिए दोनों देश किसी समझौते की संभावनाएं तलाश रहे हैं, हालांकि फिलहाल किसी बड़े ब्रेकथ्रू के संकेत नहीं मिले हैं। तेहरान में लोगों को उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम हो सकता है। इसी उम्मीद के चलते इस सप्ताह ईरानी मुद्रा में 5 प्रतिशत से ज्यादा मजबूती दर्ज की गई है।हालांकि युद्ध जैसी स्थिति, बंदरगाहों पर दबाव और आर्थिक प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी असर डाला है। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि बाजार में इलेक्ट्रॉनिक सामान और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हो रही है और कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।