पश्चिम एशिया में संघर्ष और तेज़ हो गया है, IRGC के इंटेलिजेंस चीफ़ के मारे जाने की ख़बर है। पूरे क्षेत्र में सीज़फ़ायर की बातचीत और मिसाइल हमलों के बीच ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ रहा है।
पश्चिम एशिया में ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा घटनाक्रम में ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के खुफिया प्रमुख मेजर जनरल सैयद मजीद खादेमी की मौत एक कथित अमेरिकी-इस्राइली हमले में हुई है। फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह हमला एक लक्षित कार्रवाई थी, हालांकि अब तक स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। IRGC ने इसे “आतंकवादी हमला” बताते हुए इसकी निंदा की है।
क्षेत्र में लगातार बढ़ रहा सैन्य तनाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान और इस्राइल के बीच मिसाइल हमलों और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी है। हालात ऐसे हैं कि कई शहरों में विस्फोट और हवाई हमलों की आवाजें लगातार सुनाई दे रही हैं। ईरान की ओर से भी इस्राइल और खाड़ी क्षेत्र के ठिकानों पर मिसाइल हमले किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं इस्राइल ने भी ईरान में कई सैन्य और सरकारी ठिकानों पर हमले किए हैं।
हाइफा और तेहरान में हमलों की पुष्टि
इस्राइल के उत्तरी शहर हाइफा में मिसाइल हमलों के बाद नुकसान की खबरें सामने आई हैं, जबकि ईरान की राजधानी तेहरान और आसपास के क्षेत्रों में भी कई विस्फोट दर्ज किए गए हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, कुछ रिहायशी इलाकों में भी हताहतों की सूचना है।
अमेरिका की भूमिका और ट्रंप का बयान
अमेरिका की ओर से भी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज होने की रिपोर्ट है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस की घोषणा की है, जिसे इस संकट से जोड़कर देखा जा रहा है।
युद्धविराम को लेकर कूटनीतिक प्रयास
इस बीच कूटनीतिक स्तर पर युद्धविराम की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थ देशों के बीच 45 दिन के संभावित युद्धविराम को लेकर बातचीत चल रही है। पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देश मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, अभी तक किसी ठोस समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इराक और खाड़ी देशों में भी तनाव
इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर हमलों की जानकारी सामने आई है। वहीं संयुक्त अरब अमीरात ने कहा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने में सक्रिय है। लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाइयों ने पश्चिम एशिया को एक बड़े सैन्य संकट की ओर धकेल दिया है। आम नागरिकों में डर का माहौल है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।