शुभेंदु अधिकारी के करीबी की हत्या के कुछ घंटों बाद पानीहाटी में बम हमला हुआ। पांच बीजेपी कार्यकर्ता घायल हुए। बंगाल में फिर बढ़ते राजनीतिक हिंसा के सवाल खड़े हो गए हैं।
पश्चिम बंगाल में चुनाव खत्म हुए थोड़ा समय ही बीता है। लेकिन सियासी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही। नॉर्थ 24 परगना के पानीहाटी में देर रात हुए बम हमले ने एक बार फिर राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। यह हमला उस समय हुआ जब बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के करीबी और निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या की खबर पूरे राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई थी। दोनों घटनाओं के बीच कुछ ही घंटों का अंतर रहा। इस हमले में विधायक रत्ना देबनाथ भी घायल हो गई।
पुलिस के अनुसार, बाइक सवार हमलावरों ने पानीहाटी के दत्ता रोड इलाके में बीजेपी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया। पांच लोग घायल हुए और उन्हें तुरंत कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया।
हत्या के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव
मध्यमग्राम में चंद्रनाथ रथ की हत्या ने बीजेपी को आक्रामक मोड में ला दिया है। पार्टी इसे सिर्फ आपराधिक घटना नहीं, बल्कि राजनीतिक टारगेटिंग बता रही है। शुभेंदु अधिकारी खुद उस जगह पहुंचे जहां उनके सहयोगी को घायल हालत में पाया गया था। इस दौरान बीजेपी समर्थकों में भारी नाराजगी दिखी। पार्टी नेताओं ने राज्य सरकार पर विपक्षी कार्यकर्ताओं को सुरक्षा न देने का आरोप लगाया।
पानीहाटी बम ब्लास्ट में क्या हुआ?
स्थानीय लोगों के मुताबिक बीजेपी कार्यकर्ता इलाके में लोगों से बातचीत कर रहे थे। तभी मोटरसाइकिल पर आए कुछ लोगों ने कथित तौर पर क्रूड बम फेंके और मौके से फरार हो गए। घटना नई बीजेपी विधायक रत्ना देबनाथ के घर के पास हुई। इससे इलाके में दहशत फैल गई। देर रात धमाके की आवाज के बाद लोग घरों से बाहर निकल आए और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस अब आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
बीजेपी और टीएमसी फिर आमने-सामने
बीजेपी ने सीधे तौर पर टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव नतीजों के बाद बदले की राजनीति शुरू हो गई है। वहीं, टीएमसी ने इन आरोपों को खारिज किया है। सत्ताधारी पार्टी का कहना है कि बीजेपी हर हिंसक घटना को राजनीतिक रंग देकर माहौल खराब करना चाहती है।
बंगाल की राजनीति में हिंसा का इतिहास पुराना रहा है, लेकिन हाल की घटनाओं ने फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या चुनावी मुकाबला अब सड़क की हिंसा में बदलता जा रहा है?
अधीर रंजन चौधरी ने उठाए कानून-व्यवस्था पर सवाल
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने घटना को लेकर राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार बदलने के दावों के बावजूद बंगाल में डर और हिंसा का माहौल खत्म नहीं हुआ। उन्होंने मांग की कि हत्या और बम हमले दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही दोषियों की राजनीतिक पहचान भी सार्वजनिक होनी चाहिए ताकि कार्रवाई पर सवाल न उठें।
आम लोगों में बढ़ रही चिंता
लगातार हो रही राजनीतिक हिंसा का असर सिर्फ पार्टियों तक सीमित नहीं है। जिन इलाकों में घटनाएं हो रही हैं वहां रहने वाले लोग असुरक्षा महसूस कर रहे हैं। स्थानीय कारोबारियों और परिवारों का कहना है कि देर रात सड़क पर निकलना मुश्किल हो गया है। चुनाव खत्म होने के बाद लोग सामान्य माहौल की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन ताजा घटनाओं ने फिर तनाव बढ़ा दिया है।