बंगाल में मतगणना से पहले चुनाव आयोग ने कड़ी सुरक्षा और निगरानी का प्लान लागू किया है। 2021 जैसी हिंसा रोकने के लिए इस बार खास इंतजाम किए गए हैं।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले चुनाव आयोग ने सख्ती बढ़ा दी है। नतीजों के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी या हिंसा रोकने के लिए इस बार पहले से ज्यादा कड़े इंतजाम किए गए हैं। 2021 के चुनाव के बाद हुई हिंसा को ध्यान में रखते हुए आयोग ने रणनीति बदली है। इस बार फोकस सिर्फ गिनती पर नहीं, बल्कि उसके बाद की स्थिति को संभालने पर भी है। राज्यभर में सुरक्षा, निगरानी और जवाबदेही को एक साथ जोड़कर पूरा सिस्टम तैयार किया गया है।
हर सीट पर ऑब्जर्वर की सीधी जिम्मेदारी
राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों पर तैनात जनरल ऑब्जर्वरों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे मतगणना शुरू होने से पहले केंद्र पर मौजूद रहें। सुबह 8 बजे गिनती शुरू होने से पहले उन्हें काउंटिंग हॉल में पहुंचना होगा और पूरी प्रक्रिया खत्म होने तक वहीं रहना होगा। जीत का प्रमाण पत्र दिए जाने तक उनकी जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी। किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में उन्हें जवाब देना होगा।
हर गतिविधि पर नजर
मतगणना के दौरान हर छोटी-बड़ी गतिविधि की रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है। ऑब्जर्वर लगातार अपडेट राज्य के मुख्य कंट्रोल रूम और जिला स्तर के कंट्रोल रूम को भेजेंगे। इससे किसी भी संदिग्ध स्थिति पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी और देरी की गुंजाइश कम होगी।
तीन लेयर में सुरक्षा
मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के लिए तीन स्तर की व्यवस्था लागू की गई है। सबसे अंदर काउंटिंग रूम में केंद्रीय बलों की करीब 200 कंपनियां तैनात रहेंगी। इसके अलावा दो और सुरक्षा घेरों में भी फोर्स मौजूद रहेगी। इस मल्टी-लेयर सिक्योरिटी का मकसद है कि किसी भी तरह की बाहरी दखल या तनाव को तुरंत रोका जा सके।
कम किए गए काउंटिंग सेंटर
इस बार पूरे राज्य में सिर्फ 77 काउंटिंग सेंटर बनाए गए हैं। कम केंद्र रखने का फैसला सुरक्षा बलों को केंद्रित करने के लिए लिया गया है। एंट्री के नियम भी कड़े किए गए हैं। सिर्फ अधिकृत लोग ही अंदर जा सकेंगे और उनकी पहचान तीन चरणों में जांची जाएगी। अंतिम चरण में क्यूआर कोड स्कैन के बाद ही प्रवेश मिलेगा, जिससे फर्जी एंट्री की संभावना कम हो जाएगी।
नतीजों के बाद भी हाई अलर्ट
आयोग ने सिर्फ मतगणना तक ही नहीं, बल्कि उसके बाद की स्थिति के लिए भी तैयारी की है। राज्य में 700 कंपनियां केंद्रीय बलों की तैनात रखने का फैसला लिया गया है, जो अगले आदेश तक बनी रहेंगी। इसका मकसद साफ है कि नतीजों के बाद किसी भी तरह की हिंसा या तनाव को शुरुआत में ही रोक दिया जाए।