थलपति विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही राज्य की राजनीति का समीकरण बदल दिया। पीएम मोदी के संदेश और राहुल गांधी की मौजूदगी ने नई चर्चा छेड़ दी।
चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय बाद बड़ा बदलाव देखने को मिला। टीवीके प्रमुख थलपति विजय ने चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की सत्ता अपने हाथ में ले ली। समारोह में भारी भीड़ और कड़ी सुरक्षा के बीच विजय का राजनीतिक सफर नए चरण में पहुंच गया।
शपथ ग्रहण सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा। इसे तमिलनाडु की बदलती राजनीतिक दिशा के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। छह दशक से डीएमके और एआईएडीएमके के बीच घूमती सत्ता अब नए चेहरे के पास पहुंच चुकी है। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मौजूदगी ने इस राजनीतिक बदलाव को राष्ट्रीय स्तर की चर्चा बना दिया। विजय के समर्थकों ने इसे “नई शुरुआत” बताया।
पीएम मोदी के संदेश ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर विजय को मुख्यमंत्री बनने की बधाई दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार तमिलनाडु के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करती रहेगी। राजनीतिक जानकार पीएम के इस संदेश को सिर्फ औपचारिक बधाई नहीं मान रहे।
दक्षिण भारत की राजनीति में तेजी से बदल रहे समीकरणों के बीच इसे केंद्र और तमिलनाडु के रिश्तों के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। विजय की पार्टी टीवीके पहली बार सत्ता तक पहुंची है। ऐसे में केंद्र और राज्य के संबंध आगे किस दिशा में जाएंगे, इस पर भी नजरें टिक गई हैं।
राहुल गांधी की मौजूदगी ने दिए नए संकेत
शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद रहे। विजय ने मंच पर उनके साथ जगह साझा की। कांग्रेस उन शुरुआती दलों में शामिल रही जिसने टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया था। टीवीके गठबंधन को विधानसभा में बहुमत तक पहुंचाने में कांग्रेस, सीपीआई और सीपीआई-एम की अहम भूमिका रही।
प्रदेश में 234 सदस्यीय विधानसभा में 120 विधायकों का समर्थन मिलने के बाद विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश किया। इस गठबंधन ने तमिलनाडु की राजनीति में विपक्षी एकजुटता का नया मॉडल भी सामने रखा है। खासकर ऐसे समय में जब राष्ट्रीय राजनीति में दक्षिण भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
शपथ के दौरान दिखा अलग राजनीतिक संदेश
विजय और उनके मंत्रियों ने ईश्वर के नाम पर शपथ ली। इसे भी राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि पिछली डीएमके सरकार के कई मंत्रियों ने इस परंपरा का पालन नहीं किया था। समारोह में विजय के माता-पिता एस.ए. चंद्रशेखर और शोभा चंद्रशेखर के लिए विशेष सीटें आरक्षित थीं। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई चेहरे भी कार्यक्रम में दिखाई दिए, जिनमें अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन शामिल रहीं।
टीवीके कार्यकर्ताओं का उत्साह पूरे समारोह में साफ नजर आया। स्टेडियम तालियों और नारों से गूंजता रहा। विजय के समर्थकों ने इसे “जनता की जीत” बताया।
1967 के बाद पहली बार टूटा पुराना राजनीतिक ढांचा
तमिलनाडु में 1967 के बाद पहली बार कोई गैर-द्रविड़ पार्टी सत्ता तक पहुंची है। यही वजह है कि विजय का मुख्यमंत्री बनना सिर्फ सरकार बदलने की घटना नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राज्य की राजनीतिक संस्कृति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। शनिवार रात विजय ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात कर सहयोगी दलों के समर्थन पत्र सौंपे थे। राज्यपाल ने उन्हें 13 मई या उससे पहले विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने का निर्देश दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विजय अपनी लोकप्रियता को लंबे राजनीतिक जनाधार में बदल पाएंगे या तमिलनाडु की राजनीति फिर पुराने ढांचे की तरफ लौटेगी।