कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि मंत्री पर कार्रवाई में देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की कार्रवाई की जानकारी देने वाली अधिकारी सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ अभियोजन मंजूरी में देरी अब स्वीकार नहीं की जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा, “बहुत हो गया, अब हमारे आदेश का पालन कीजिए।” कोर्ट की यह टिप्पणी उस समय आई जब सरकार की ओर से बताया गया कि मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी पर फैसला अभी लंबित है।
SIT की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने की। कोर्ट ने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) द्वारा भेजे गए अभियोजन प्रस्ताव पर दो सप्ताह पहले ही फैसला हो जाना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट ने पहले स्वतः संज्ञान लेते हुए SIT जांच के आदेश दिए थे। सुनवाई के दौरान CJI ने कहा, 'सबसे पहले माफी मांगनी चाहिए थी। यह मामला तब सामने आया जब हमने स्वतः संज्ञान लिया।'
‘दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण’
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मंत्री का बयान “दुर्भाग्यपूर्ण” था और संभवतः वे महिला अधिकारी की प्रशंसा करना चाहते थे। इस पर CJI ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं था, बल्कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण था।” जब तुषार मेहता ने दोबारा कहा कि मंत्री अपनी बात सही तरीके से व्यक्त नहीं कर पाए, तब कोर्ट ने कहा कि एक अनुभवी राजनेता को महिला अधिकारी की प्रशंसा करना अच्छी तरह आता है।
कोर्ट ने पुराने बयानों का भी लिया संज्ञान
जस्टिस बागची ने सुनवाई के दौरान SIT रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मंत्री पहले भी इस तरह की टिप्पणियां करते रहे हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि पूरे मामले की परिस्थितियों को देखते हुए उचित फैसला लिया जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
क्या है पूरा विवाद?
Operation Sindoor के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी उन सैन्य अधिकारियों में शामिल थीं जिन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय सेना की कार्रवाई की जानकारी मीडिया को दी थी। यह अभियान 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद चलाया गया था, जिसमें 26 भारतीय नागरिकों की मौत हुई थी।
इसी दौरान मंत्री कुंवर विजय शाह ने बयान दिया था कि “जिन लोगों ने हमारी बेटियों को विधवा बनाया, उन्हें सबक सिखाने के लिए हमने उन्हीं की एक बहन को भेजा।” इस टिप्पणी के बाद देशभर में विवाद खड़ा हो गया था और विपक्ष समेत कई संगठनों ने इसे महिला सैन्य अधिकारी का अपमान बताया था।