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सेंसेक्स न्यूनतम स्तर पर

तेज बिकवाली के कारण सेंसेक्स डेढ़ साल के न्यूनतम स्तर पर पहुँचा

मुंबई में सेंसेक्स 570.59 अंक गिरकर 71,909.70 पर बंद हुआ, जो 7 अप्रैल 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है। निफ्टी भी गिरावट में।


तेज बिकवाली के कारण सेंसेक्स डेढ़ साल के न्यूनतम स्तर पर पहुँचा

मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार चौथे दिन गिरावट रही। तेज बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स 570.59 अंक टूटकर 71,909.70 पर बंद हुआ। यह 7 अप्रैल 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है। वहीं, निफ्टी 198.50 अंक गिरकर 22,421.95 पर आ गया। यह 30 मार्च 2026 के बाद का निचला स्तर है।दोपहर बाद बाजार में बिकवाली और तेज हो गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव रहा। निफ्टी मिडकैप-50 में 1.11% और स्मॉलकैप-100 में 0.97% की गिरावट दर्ज की गई।

ऑटो और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव

सेक्टरों में निफ्टी ऑटो 3.46% गिरा। इसके अलावा मेटल 2.35%, मीडिया 2.33%, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.91%, एफएमसीजी 1.61%, केमिकल 1.48%, रियल्टी 1.46% और ऑयल एंड गैस 1.32% नीचे रहे। निफ्टी आईटी को छोड़कर बाकी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए।

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 24 शेयरों में गिरावट रही। मारुति सुजुकी 4.59% टूटकर सबसे ज्यादा नुकसान में रही। महिंद्रा एंड महिंद्रा 3.27% और टाटा स्टील 3.01% नीचे रहे। अडानी पोर्ट्स, आईटीसी, पावरग्रिड और हिंदुस्तान यूनिलीवर में भी 2% से ज्यादा की गिरावट रही।इसके उलट इंफोसिस 4.02% चढ़ा, जबकि टीसीएस 1.43% और एचसीएल टेक्नोलॉजीज 1.38% मजबूत हुए। एचडीएफसी बैंक भी बढ़त के साथ बंद हुआ।

एशियाई बाजारों में जापान मजबूत

एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई 3.30% चढ़ा। हांगकांग का हैंग सेंग 0.37% और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.31% बढ़ा। यूरोपीय बाजारों में शुरुआती कारोबार में ब्रिटेन का एफटीएसई 0.80% नीचे था, जबकि जर्मनी के डैक्स में मामूली 0.04% तेजी रही।

रुपये पर भी दबाव

डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर हुआ। शुरुआती कारोबार में रुपया 3 पैसे गिरकर 95.97 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया। कारोबारियों के मुताबिक सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर मांग, विदेशी पूंजी की निकासी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती से रुपये पर दबाव रहा। हालांकि, आरबीआई की डॉलर बिक्री से गिरावट सीमित रही।बाजार में गिरावट के पीछे अक्टूबर की आरबीआई मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट बढ़ने की आशंका को भी एक कारण बताया जा रहा है।

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