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Sagarika Ghosh Slams TMC Rebels Over Defection

TMC में बगावत पर सागरिका घोष का हमला, बोलीं- जनादेश का सम्मान कहां गया?

टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दल-बदल की राजनीति और जनादेश के सम्मान पर सवाल उठाए।


tmc में बगावत पर सागरिका घोष का हमला बोलीं- जनादेश का सम्मान कहां गया

Bengal Politics News |

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने पार्टी में उभरे असंतोष और कथित बगावत को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चुनावी नतीजों के बाद पार्टी से दूरी बनाने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जनादेश और राजनीतिक प्रतिबद्धता का सम्मान होना चाहिए। सागरिका ने दल-बदल की राजनीति को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।

चुनावी हार के बाद नेताओं के रुख पर उठाए सवाल

सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने विस्तृत संदेश में सागरिका घोष ने कहा कि किसी राजनीतिक दल के प्रतीक और नेतृत्व के नाम पर चुनाव जीतने के बाद मुश्किल समय में उसी पार्टी का साथ छोड़ देना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने लिखा कि यदि किसी नेता या कार्यकर्ता की निष्ठा सिर्फ जीत तक सीमित है, तो फिर उसकी वैचारिक प्रतिबद्धता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। उनके अनुसार, राजनीति केवल सत्ता का माध्यम नहीं बल्कि विचारों और मूल्यों की लड़ाई भी है।

बीजेपी और मोदी सरकार के खिलाफ लड़ाई का किया जिक्र

सागरिका घोष ने अपने राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सार्वजनिक जीवन में इसलिए कदम रखा क्योंकि उन्हें लगता है कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए मजबूत विपक्ष की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व पर उनका भरोसा पहले भी था और आगे भी रहेगा। सागरिका ने ममता बनर्जी को साहसी और सिद्धांत आधारित राजनीति करने वाली नेता बताते हुए उनका समर्थन दोहराया।

अमित शाह के नाम का भी लिया उल्लेख

अपने बयान में सागरिका घोष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कुछ नेताओं की राजनीतिक निष्ठा एक फोन कॉल आने के बाद बदल जाती है। उनके मुताबिक, यदि जीत के समय पार्टी के साथ रहना और चुनौती आने पर उसका साथ छोड़ देना सामान्य राजनीतिक व्यवहार बन जाए, तो जनादेश का महत्व कमजोर पड़ जाएगा। उन्होंने ऐसे कदमों को 'शर्मनाक' बताते हुए कहा कि जनता के भरोसे का सम्मान हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।

टीएमसी के भीतर बढ़ी हलचल

उधर, टीएमसी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने भी पार्टी से अलग रुख अपनाने वाले सांसदों पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने दावा किया कि कुछ सांसदों के संपर्क में बीजेपी के वरिष्ठ नेता रहे हैं। हालांकि जिन नेताओं के नाम सामने आए हैं, उनकी ओर से इस संबंध में सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

इस बीच बागी खेमे का दावा है कि कई लोकसभा सांसद एनडीए के समर्थन में आगे आ सकते हैं। पार्टी के भीतर जारी इस राजनीतिक खींचतान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि टीएमसी नेतृत्व इस चुनौती से कैसे निपटता है और बागी नेताओं का अगला कदम क्या होता है।

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