प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वीडन ने ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार’ सम्मान से नवाजा। राजकुमारी विक्टोरिया ने सम्मान सौंपा और रवींद्रनाथ टैगोर से जुड़ा खास ऐतिहासिक उपहार भी दिया गया।
प्रधानमंत्री Narendra Modi को स्वीडन की यात्रा के दौरान बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिला है। स्वीडन ने उन्हें अपने सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार’ से सम्मानित किया। यह सम्मान स्वीडन की राजकुमारी Crown Princess Victoria ने विशेष समारोह में प्रदान किया।
पीएम मोदी फिलहाल पांच देशों के दौरे पर हैं और स्वीडन उनकी यात्रा का तीसरा चरण था। इस सम्मान को भारत और स्वीडन के बीच मजबूत होते रिश्तों का बड़ा संकेत माना जा रहा है। खास बात यह रही कि सम्मान के साथ पीएम मोदी को एक ऐतिहासिक और भावनात्मक उपहार भी दिया गया, जिसने इस समारोह को और खास बना दिया।
टैगोर से जुड़ा खास उपहार बना चर्चा का केंद्र
समारोह में पीएम मोदी को एक विशेष बॉक्स भेंट किया गया, जिसमें Rabindranath Tagore के दो हस्तलिखित कार्ड्स की हूबहू प्रतियां रखी गई थीं।
दरअसल, ये कार्ड भारत और स्वीडन के पुराने सांस्कृतिक संबंधों की याद दिलाते हैं। यही वजह है कि यह उपहार सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक भी माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी यह ऐतिहासिक गिफ्ट काफी चर्चा में है।
क्यों दिया गया यह सम्मान?
स्वीडन सरकार ने पीएम मोदी को यह सम्मान भारत-स्वीडन संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए प्रदान किया है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, हरित ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग तेजी से बढ़ा है।
फिलहाल दोनों देश AI, ग्रीन टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट सॉल्यूशन और इनोवेशन पर मिलकर काम कर रहे हैं। यही कारण है कि इस सम्मान को सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
भारत-स्वीडन साझेदारी में क्या बदल रहा है?
हाल के वर्षों में भारत और Sweden के संबंध रणनीतिक साझेदारी की दिशा में तेजी से आगे बढ़े हैं। स्वीडिश कंपनियां भारत में निवेश बढ़ा रही हैं, जबकि भारत टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सहयोग मजबूत कर रहा है।
पीएम मोदी ने भी अपने संबोधन में कहा कि भारत और स्वीडन लोकतांत्रिक मूल्यों, इनोवेशन और टिकाऊ विकास को लेकर समान सोच रखते हैं। ऐसे में आने वाले समय में दोनों देशों के बीच रक्षा उत्पादन, हरित ऊर्जा और स्टार्टअप सेक्टर में बड़े समझौते देखने को मिल सकते हैं।
यही वजह है कि पीएम मोदी की यह यात्रा सिर्फ एक कूटनीतिक दौरा नहीं, बल्कि यूरोप के साथ भारत की बदलती रणनीतिक साझेदारी का अहम संकेत भी मानी जा रही है।