पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3-3 रुपए की बढ़ोतरी से आम जनता पर असर पड़ा है। दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में नए रेट लागू हो गए हैं। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से यह बदलाव हुआ है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें (Primary Keyword) में 15 मई से 3-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी लागू हो गई है। दिल्ली में अब पेट्रोल 97.77 रुपए और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। इस फैसले के बाद देशभर के प्रमुख शहरों में ईंधन महंगा हो गया है, जिससे आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ा है जानकारी के मुताबिक यह बढ़ोतरी करीब 2 साल बाद की गई है। इससे पहले मार्च 2024 से कीमतें स्थिर थीं, जबकि लोकसभा चुनाव से पहले थोड़ी कटौती भी की गई थी।
प्रमुख शहरों में नए रेट लागू
नई कीमतों के बाद दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में ईंधन के दाम बढ़ गए हैं।
- दिल्ली में पेट्रोल 97.77 और डीजल 90.67 रुपए
- मुंबई में पेट्रोल 106.68 और डीजल 93.14 रुपए
- कोलकाता में पेट्रोल 108.74 और डीजल 95.13 रुपए
- चेन्नई में पेट्रोल 103.67 और डीजल 95.25 रुपए
यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें (Primary Keyword) पर असर डाल रही है, जिससे ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजों की लागत बढ़ने की आशंका है।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाया दबाव
ईंधन महंगा होने की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दामों में तेजी बताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और अमेरिका से जुड़े तनाव के बीच कच्चा तेल 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इससे ग्लोबल सप्लाई पर दबाव बढ़ा और तेल कंपनियों की लागत भी बढ़ गई।
तेल कंपनियों पर भारी घाटा, सिस्टम पर दबाव
सरकारी तेल कंपनियों ने लंबे समय से कीमतें स्थिर रखकर उपभोक्ताओं को राहत दी थी, लेकिन अब घाटे की स्थिति सामने आई है।Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी कंपनियां लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती लागत का दबाव झेल रही थीं।जानकारी के अनुसार, इन कंपनियों को हर महीने हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था, जिसे संतुलित करने के लिए यह मूल्य संशोधन जरूरी माना जा रहा है।
पहले क्यों स्थिर थे दाम, अब क्यों बदलाव?
मार्च 2024 से देश में पेट्रोल और डीजल के दाम लगभग स्थिर रखे गए थे। उस दौरान सरकार ने चुनाव से पहले 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती भी की थी। हालांकि तकनीकी रूप से ईंधन की कीमतें हर दिन बदल सकती हैं, लेकिन राजनीतिक और आर्थिक कारणों से लंबे समय तक स्थिरता बनाए रखी गई थी। अब वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव के बाद संशोधन किया गया है।
आम लोगों और बाजार पर असर
इस बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से सब्जी, अनाज और रोजमर्रा की वस्तुओं के दामों पर भी असर पड़ सकता है।विशेषज्ञों के मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतें (Primary Keyword) और बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई पर दबाव बढ़ेगा।