पहलगाम आतंकी हमले की जांच में NIA को बड़ा सुराग मिला है। रिपोर्ट के अनुसार आतंकियों के मोबाइल पाकिस्तान से जुड़े नेटवर्क और सप्लाई चेन के जरिए पहुंचे थे, जिनका इस्तेमाल साजिश में हुआ।
पहलगाम आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को ऐसे डिजिटल और सप्लाई नेटवर्क के सुराग मिले हैं। इन्होंने पूरी साजिश की परतें और गहरी कर दी हैं। जांच में सामने आया है कि हमले से जुड़े मोबाइल फोन पाकिस्तान के कराची और लाहौर नेटवर्क से जुड़े स्रोतों के जरिए सप्लाई हुए थे। एजेंसी के अनुसार ये मोबाइल डिवाइस कई साल (4 साल) पहले खरीदे गए थे। लेकिन इन्हें हमले से ठीक पहले सक्रिय किया गया था। अब इन्हीं डिवाइस से जुड़ा डेटा जांच एजेंसियों के लिए अहम कड़ी बन गया है।
विदेशी सप्लाई चेन से कैसे पहुंचे डिवाइस
NIA की जांच में सामने आया है कि दो मोबाइल फोन Xiaomi की सप्लाई चेन के जरिए 2021 और 2023 में पाकिस्तान पहुंचे थे। इनमें से एक डिवाइस कराची की कंपनी Tech Sirat Pvt Ltd के जरिए इम्पोर्ट किया गया था। दूसरा मोबाइल लाहौर की एक बड़ी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के माध्यम से पाकिस्तान पहुंचा। शुरुआती रिकॉर्ड बताते हैं कि यह पूरा नेटवर्क औपचारिक आयात चैनल के जरिए संचालित हुआ, लेकिन बाद में इन डिवाइस का इस्तेमाल संदिग्ध गतिविधियों में किया गया।
बैसरन लोकेशन और डिजिटल फुटप्रिंट
फोरेंसिक जांच में सबसे अहम जानकारी मोबाइल के नेविगेशन एप AlpineQuest से मिली, जिसमें बैसरन घाटी की लोकेशन पहले से सेव थी। इसके अलावा कई स्क्रीनशॉट भी मिले हैं, जो 15 और 16 अप्रैल के आसपास लिए गए थे। इन्हीं डिजिटल संकेतों के आधार पर एजेंसियां यह मान रही हैं कि इलाके की रेकी पहले से की गई थी और टारगेटिंग की तैयारी पहले चरण में ही शुरू हो चुकी थी।
चार साल तक निष्क्रिय फिर अचानक एक्टिवेशन
जांच में यह भी सामने आया कि मोबाइल लंबे समय तक बंद या निष्क्रिय रहे और फिर हमले से करीब एक हफ्ते पहले ही इन्हें सक्रिय किया गया। एजेंसियां इस पैटर्न को योजनाबद्ध तैयारी के तौर पर देख रही हैं, जिसमें डिवाइस को सुरक्षित रखकर जरूरत के समय इस्तेमाल किया गया।
नेटवर्क और कम्युनिकेशन पैटर्न की जांच
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि डिवाइस से सामान्य कॉल, मैसेज या इंटरनेट गतिविधि का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इससे संकेत मिलता है कि संचार के लिए मोबाइल नेटवर्क की बजाय वैकल्पिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या लंबी दूरी की रेडियो कम्युनिकेशन तकनीक का उपयोग ऑपरेशन के दौरान किया गया था।
GoPro कैमरा और डिजिटल मॉड्यूल का लिंक
इस मामले में एक और अहम कड़ी तब सामने आई जब आतंकियों से बरामद GoPro कैमरे की सप्लाई चेन की जांच की गई। यह कैमरा चीन के माध्यम से आतंक नेटवर्क तक पहुंचा था। जांच एजेंसियों का मानना है कि ऐसे उपकरण हमलों की रिकॉर्डिंग और प्रचार के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जिससे आतंक नेटवर्क की कार्यप्रणाली और डिजिटल रणनीति का पता चलता है।
पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश
NIA की जांच अब केवल एक हमले तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच में बदल चुकी है। मोबाइल, कैमरा और डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर एजेंसियां सप्लाई चेन से लेकर ऑपरेशनल नेटवर्क तक हर कड़ी जोड़ने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच शुरुआती निष्कर्षों पर है, लेकिन मिले संकेतों ने पूरे केस की दिशा और गंभीरता दोनों को और स्पष्ट कर दिया है।