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मोदी से मिले म्यांमार राष्ट्रपति

प्रतिबंधों से घिरे म्यांमार राष्ट्रपति से मिले पीएम मोदी, भारत के इस कदम पर क्यों टिकी दुनिया की नजर?

पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का सामना कर रहे म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने भारत दौरे पर पीएम मोदी से मुलाकात की। जानिए इस मुलाकात के रणनीतिक और कूटनीतिक मायने क्या हैं।


प्रतिबंधों से घिरे म्यांमार राष्ट्रपति से मिले पीएम मोदी भारत के इस कदम पर क्यों टिकी दुनिया की नजर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग से नई दिल्ली में मुलाकात की। खास बात यह है कि राष्ट्रपति बनने के बाद मिन आंग ह्लाइंग का यह पहला विदेश दौरा है और भारत उन्हें आधिकारिक तौर पर मेजबानी देने वाला पहला बड़ा देश बन गया है म्यांमार के सैन्य नेतृत्व पर 2021 के तख्तापलट के बाद अमेरिका और कई पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए थे। ऐसे में इस मुलाकात को सिर्फ एक राजनयिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की बदलती रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

आखिर भारत के लिए म्यांमार इतना अहम क्यों?

दरअसल, म्यांमार भारत की "एक्ट ईस्ट" और "नेबरहुड फर्स्ट" नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। दोनों देशों की लंबी सीमा साझा है और पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे सीधे म्यांमार से प्रभावित होते हैं।  भारत लंबे समय से म्यांमार में संपर्क परियोजनाओं पर काम कर रहा है। कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट प्रोजेक्ट और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी योजनाएं दक्षिण-पूर्व एशिया तक भारत की पहुंच मजबूत करने के लिए अहम मानी जाती हैं।

चीन फैक्टर भी बना बड़ी वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुलाकात के पीछे एक बड़ा कारण चीन का बढ़ता प्रभाव भी है। म्यांमार लंबे समय से बीजिंग के रणनीतिक प्रभाव क्षेत्र में रहा है। ऐसे में भारत नहीं चाहता कि उसका पड़ोसी देश पूरी तरह चीन पर निर्भर हो जाए।  रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत म्यांमार के साथ सुरक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहा है। वहीं म्यांमार की सैन्य सरकार भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

विवाद भी कम नहीं, उठ रहे सवाल

हालांकि इस यात्रा को लेकर आलोचना भी हो रही है। मानवाधिकार संगठनों और लोकतंत्र समर्थक समूहों का कहना है कि म्यांमार की सैन्य सरकार पर गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप हैं और ऐसे में भारत की मेजबानी उसे अंतरराष्ट्रीय वैधता देने जैसी दिखाई दे सकती है।  2021 में आंग सान सू ची की निर्वाचित सरकार को हटाने के बाद म्यांमार लगातार राजनीतिक संकट और गृह संघर्ष से जूझ रहा है। कई पश्चिमी देशों ने मिन आंग ह्लाइंग पर प्रतिबंध लगाए हुए हैं और उन्हें क्षेत्रीय मंचों से भी दूर रखा गया था।

मुलाकात में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

भारतीय और म्यांमार नेतृत्व के बीच व्यापार, सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, कनेक्टिविटी परियोजनाओं और तकनीकी सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।  म्यांमार के राष्ट्रपति अपने दौरे के दौरान बोधगया भी पहुंचे और बाद में मुंबई में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात का कार्यक्रम भी तय किया गया। उनके साथ कैबिनेट मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और कारोबारी प्रतिनिधियों का बड़ा दल भी भारत आया है। 

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