इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। दिल्ली स्थित घर में जले हुए नोट मिलने के मामले में आंतरिक जांच चल रही थी। महाभियोग की चर्चा के बीच उन्होंने राष्ट्रपति को त्यागपत्र सौंपा
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट में तैनात न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम उस समय सामने आया है जब उनके दिल्ली स्थित आवास पर कथित तौर पर बड़ी मात्रा में जले हुए नोट मिलने के मामले को लेकर आंतरिक जांच चल रही थी।
दिल्ली आवास में जले हुए नोट मिलने से बढ़ा मामला
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली स्थित उनके आवास में जले हुए नोट मिलने के बाद विवाद गहरा गया था। इस घटना के बाद न्यायिक हलकों में हलचल बढ़ी और उनके खिलाफ आंतरिक जांच प्रक्रिया शुरू की गई। इसके बाद उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया गया था, जहां वे वर्ष 2025 में शपथ ग्रहण कर चुके थे। हालांकि, विवाद के चलते उन्हें न्यायिक कार्यों से फिलहाल अलग रखा गया था।
आंतरिक जांच और महाभियोग की चर्चा
मामले की गंभीरता को देखते हुए आंतरिक जांच समिति का गठन किया गया था। साथ ही संसद में कुछ सांसदों द्वारा महाभियोग लाने के लिए नोटिस दिए जाने की भी खबरें सामने आई थीं। इस पूरे घटनाक्रम ने न्यायिक व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया है।
राष्ट्रपति को सौंपा त्यागपत्र
न्यायमूर्ति वर्मा ने राष्ट्रपति को भेजे अपने त्यागपत्र में लिखा कि वे अत्यंत पीड़ा के साथ पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि इस पद पर सेवा करना उनके लिए सम्मान की बात रही। यह मामला न्यायिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर चर्चा का विषय बन गया है। जांच समिति की रिपोर्ट और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।