मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच भारतीय एयरलाइंस ने लंबी दूरी की उड़ानों के किराए में करीब 15% बढ़ोतरी की है। जेट फ्यूल महंगा होने से एविएशन इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ा है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आम यात्रियों की जेब पर भी दिखाई देने लगा है। रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय एयरलाइंस ने लंबी दूरी की उड़ानों के किराए में करीब 15% तक बढ़ोतरी कर दी है। इसका मुख्य कारण कच्चे तेल और जेट फ्यूल की कीमतों में तेज उछाल बताया जा रहा है।
जेट फ्यूल महंगा होने से बढ़ा खर्च
एविएशन इंडस्ट्री में जेट फ्यूल, जिसे एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) कहा जाता है, एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट में इसकी हिस्सेदारी करीब 30% से 40% तक होती है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण तेल की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और जेट फ्यूल भी काफी महंगा हो गया है। इसी वजह से एयरलाइंस कंपनियों को अपने ऑपरेशनल खर्च को संतुलित करने के लिए टिकट कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ी है।
जेट फ्यूल की कीमत लगभग दोगुनी
रिपोर्ट्स के मुताबिक संघर्ष शुरू होने से पहले जेट फ्यूल की कीमत करीब 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी। लेकिन हाल के हफ्तों में यह बढ़कर लगभग 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच गई है। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है। हाल ही में इसकी कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थी, जबकि कुछ समय पहले यह 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब तक भी चली गई थी।
एयरलाइंस आगे भी बढ़ा सकती हैं किराया
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले समय में हवाई किराया और बढ़ सकता है। कई एयरलाइंस कंपनियां लागत कम करने के लिए अपने कुछ विमानों को अस्थायी रूप से ग्राउंड करने की योजना भी बना रही हैं।इसके अलावा मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कई देशों के हवाई मार्ग भी प्रभावित हुए हैं, जिससे उड़ानों की दूरी और ईंधन खपत दोनों बढ़ रही हैं।एविएशन सेक्टर से जुड़े आंकड़ों के अनुसार क्षेत्रीय तनाव के कारण दुनियाभर में अब तक 40,000 से ज्यादा उड़ानें प्रभावित या रद्द हो चुकी हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय यात्रा उद्योग पर भी दबाव बढ़ रहा है।