भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) साइन हो गया है, जिसे हाल के वर्षों की सबसे तेज व्यापार डील माना जा रहा है। इस समझौते पर भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के ट्रेड मंत्री टॉड मैक्ले ने हस्ताक्षर किए। मार्च 2025 में शुरू हुई बातचीत सिर्फ 9 महीने में पूरी हो गई।
डील का असर सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। यह निवेश, नौकरियों और विदेशी पढ़ाई के मौके तक सीधे जुड़ा है। यही वजह है कि इसे ‘हाई-इम्पैक्ट’ समझौता कहा जा रहा है।
टैरिफ घटने से किसे होगा सीधा फायदा?
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत न्यूजीलैंड भारतीय प्रोडक्ट्स पर लगने वाले कई टैक्स हटाएगा। टेक्सटाइल, लेदर, ऑटो पार्ट्स, चाय, कॉफी और मसाले जैसे सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा। इससे भारतीय एक्सपोर्ट सस्ता होगा और ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
भारत ने क्या बचाया, क्या खोला?
भारत ने अपने बाजार का करीब 70% हिस्सा खोला, लेकिन 30% संवेदनशील सेक्टर को सुरक्षित रखा। डेयरी प्रोडक्ट्स जिसमें दूध, पनीर और मक्खन को पूरी तरह बाहर रखा गया। यह फैसला किसानों के दबाव और राजनीतिक संतुलन को दिखाता है।
20 अरब डॉलर निवेश से क्या बदलेगा?
न्यूजीलैंड ने अगले 15 साल में भारत में करीब 20 अरब डॉलर निवेश का वादा किया है। यह पैसा इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और सर्विस सेक्टर में जाएगा। इससे रोजगार और इंडस्ट्रियल ग्रोथ को सीधा बूस्ट मिलने की उम्मीद है।
छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए क्या खुला?
इस डील का सबसे बड़ा असर युवाओं पर दिखेगा। न्यूजीलैंड ने 100+ सर्विस सेक्टर भारतीयों के लिए खोल दिए हैं। साथ ही 5000 प्रोफेशनल्स को IT, हेल्थकेयर और एजुकेशन में काम करने का मौका मिलेगा। STEM पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के लिए भी राहत है। अब पढ़ाई के बाद ज्यादा समय तक वहां काम करने का मौका मिलेगा।
क्या यह डील राजनीतिक और आर्थिक गेमचेंजर है?
यह समझौता सिर्फ आर्थिक नहीं, रणनीतिक भी माना जा रहा है। भारत ने एक तरफ किसानों के हित सुरक्षित रखे, तो दूसरी तरफ ग्लोबल ट्रेड में अपनी पकड़ मजबूत की। अब नजर इस पर है कि दोनों देशों की मंजूरी के बाद यह डील जमीन पर कितनी तेजी से लागू होती है।