मिडिल ईस्ट युद्ध के खतरे के बीच भारत सरकार ने रिफाइनरी कंपनियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया। कतर से गैस सप्लाई घटने से CNG और PNG महंगी होने की आशंका बढ़ी।
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब धीरे-धीरे भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी असर डालने लगा है। सरकार ने एहतियातन बड़ा कदम उठाते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को रसोई गैस (LPG) का उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है।
सूत्रों के अनुसार, यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि अगर ईरान-इजराइल संघर्ष और बढ़ता है तो गैस की सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ सकता है। ऐसे में घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की किल्लत न हो, इसके लिए सरकार ने इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश जारी किया।
रिफाइनरियों को सरकार का साफ आदेश
रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने गुरुवार देर रात जारी निर्देश में कहा है कि अब रिफाइनरी कंपनियां अपने पास मौजूद प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल सिर्फ रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी। यानी इन गैसों का उपयोग फिलहाल पेट्रोकेमिकल या अन्य इंडस्ट्रियल कामों में नहीं किया जाएगा। सरकार का मकसद साफ है कि देश के करीब 33.2 करोड़ LPG उपभोक्ताओं तक बिना रुकावट गैस सिलेंडर की सप्लाई जारी रखना।
सरकारी तेल कंपनियों को मिलेगी प्राथमिकता
सरकार के आदेश के मुताबिक प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई सबसे पहले सरकारी तेल कंपनियों को दी जाएगी। इसमें प्रमुख रूप से इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भोपाल पेट्रोलियम, जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों के जरिए ही देशभर में LPG सिलेंडर की सप्लाई होती है, इसलिए इन्हें प्राथमिकता देना जरूरी माना गया है।
LPG, प्रोपेन और ब्यूटेन क्या होते हैं?
LPG यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस, जो मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है। यही गैस घरेलू सिलेंडरों में इस्तेमाल की जाती है।
वहीं, प्रोपेन और ब्यूटेन ये दोनों हाइड्रोकार्बन गैसें हैं जो कच्चे तेल की रिफाइनिंग के दौरान निकलती हैं। इनका इस्तेमाल पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री, प्लास्टिक उत्पादन और ईंधन के रूप में भी किया जाता है।
रिलायंस जैसी कंपनियों पर पड़ सकता है असर
सरकार के इस फैसले का असर प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों जैसे खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज पर भी पड़ सकता है। दरअसल, प्रोपेन और ब्यूटेन को LPG बनाने में लगाने से अल्काइलेट्स और पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स का उत्पादन कम हो सकता है। ये उत्पाद पेट्रोल की गुणवत्ता सुधारने और पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री में इस्तेमाल होते हैं, जिनकी बाजार में कीमत भी ज्यादा होती है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।
कतर में LNG उत्पादन रुका
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के कारण भारत को मिलने वाली गैस सप्लाई भी प्रभावित हुई है। भारत को LNG सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देशों में से एक Qatar ने अपने कुछ प्लांट्स का उत्पादन रोक दिया है। बताया जा रहा है कि भारत आने वाली गैस सप्लाई में करीब 40% तक कटौती हुई है। भारत हर साल करीब 2.7 करोड़ टन LNG कतर से आयात करता है। यही LNG बाद में गैस में बदलकर CNG और PNG के रूप में शहरों में सप्लाई की जाती है।
LNG प्लांट पर ड्रोन हमला, उत्पादन बंद
कतर की ऊर्जा कंपनी QatarEnergy के अनुसार ईरान की ओर से ड्रोन हमले के बाद सुरक्षा कारणों से रास लफान और मेसाईद इंडस्ट्रियल सिटी के प्लांट्स का उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय गैस सप्लाई में अस्थिरता बढ़ गई है।
CNG-PNG के दाम बढ़ने की आशंका
गैस की कमी को देखते हुए सिटी गैस कंपनियों ने भी सरकार को चेतावनी दी है कि अगर सस्ती कॉन्ट्रैक्ट गैस नहीं मिली, तो उन्हें स्पॉट मार्केट से गैस खरीदनी पड़ेगी। स्पॉट मार्केट में गैस की कीमत फिलहाल करीब 25 डॉलर प्रति यूनिट तक पहुंच चुकी है, जो सामान्य कॉन्ट्रैक्ट कीमत से कहीं ज्यादा है। कंपनियों को यह भी डर है कि अगर CNG बहुत महंगी हो गई तो लोग धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की ओर शिफ्ट हो सकते हैं।
पेट्रोनेट LNG ने जारी किया ‘फोर्स मेजर’ नोटिस
भारत की प्रमुख गैस आयातक कंपनी Petronet LNG ने भी कतर की कंपनी को फोर्स मेजर नोटिस भेजा है। फोर्स मेजर का मतलब है कि युद्ध या बड़े संकट जैसी परिस्थितियों के कारण कंपनी तय समझौते के अनुसार गैस सप्लाई नहीं कर पा रही। कंपनी ने GAIL, Indian Oil Corporation और भारत पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को भी सप्लाई कम होने की जानकारी दे दी है।