भारत की अर्थव्यवस्था ने 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की मजबूत GDP वृद्धि दर्ज की। विनिर्माण, घरेलू खपत, निवेश और सरकारी खर्च ने ग्रोथ को गति दी।
नई दिल्ली। वैश्विक चुनौतियों और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत की अर्थव्यवस्था ने 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की मजबूत वृद्धि दर्ज की है। अप्रैल-जून तिमाही की यह ग्रोथ भारतीय रिजर्व बैंक के 7% के अनुमान से भी ज्यादा रही।
घरेलू मांग और सरकारी खर्च से मिली ताकत
अर्थव्यवस्था को मजबूत घरेलू मांग, सरकारी खर्च, निवेश और विनिर्माण क्षेत्र से बड़ा सहारा मिला। विनिर्माण क्षेत्र में 9.2% की वृद्धि दर्ज की गई। बिजली, गैस और दूसरी उपयोगिता सेवाओं में भी करीब 9% की ग्रोथ रही। वित्तीय, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सेवाओं में 12% से ज्यादा की वृद्धि हुई। घरेलू खपत करीब 7% बढ़ी, जबकि निवेश में लगभग 12% की वृद्धि दर्ज की गई।
सरकारी खर्च ने भी दिया बड़ा सहारा
सड़कों, रेलवे और दूसरी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर सरकारी खर्च जारी रहा। इससे सीमेंट, स्टील, इंजीनियरिंग, परिवहन और श्रम जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ी।
भारत की ऊर्जा जरूरत बड़ी चुनौती
भारत अपनी कच्चे तेल की करीब 90% जरूरत आयात से पूरी करता है। एलपीजी की लगभग 60% खपत भी आयात से पूरी होती है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी थी। इसके बावजूद भारत ने करीब 40 देशों से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाकर होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने की कोशिश की। रिफाइनरियों ने भी अपनी क्षमता के अनुसार काम जारी रखा।
GST कलेक्शन में भी बढ़ोतरी
अप्रैल-जून के दौरान सकल GST राजस्व करीब 63 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि से 8.4% ज्यादा है। जून में GST कलेक्शन 13.9% बढ़ा। हालांकि GST और आयकर संग्रह सीधे GDP में नहीं जुड़ते, लेकिन बढ़ता कलेक्शन आर्थिक गतिविधियों और बेहतर टैक्स अनुपालन का संकेत देता है।
PM मोदी ने बताया मजबूत विकास का संकेत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने GDP के आंकड़ों को भारत की मजबूत विकास गति का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने आर्थिक प्रदर्शन का श्रेय सुधारों और जनता की मेहनत को दिया।
आगे भी कई चुनौतियां
विशेषज्ञों के मुताबिक 7.8% की ग्रोथ के बावजूद अर्थव्यवस्था के सामने कुछ जोखिम बने हुए हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, रुपये पर दबाव, वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां और अनियमित मानसून इनमें प्रमुख हैं। इसके बावजूद पहली तिमाही के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि भारत की आर्थिक वृद्धि अब केवल एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं है। घरेलू खपत, विनिर्माण, सेवाएं, निवेश और सरकारी खर्च सभी ने ग्रोथ में योगदान दिया है।