भारत ने कलपक्कम में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के साथ परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया। यह उपलब्धि ऊर्जा आत्मनिर्भरता और न्यूक्लियर प्रोग्राम का अहम हिस्सा है।
भारत ने अपनी परमाणु यात्रा में एक ऐसा कदम उठा लिया है, जो आने वाले दशकों की ऊर्जा तस्वीर बदल सकता है। तमिलनाडु के कलपक्कम में 500 मेगावाट इलेक्ट्रिक प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकलिटी हासिल कर ली है और इसके साथ ही भारत ने अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम के दूसरे चरण में औपचारिक प्रवेश कर लिया है। यह सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर वैज्ञानिक क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा के बड़े विजन का संकेत है।
इसका मतलब है कि रिएक्टर में अब एक स्थिर और नियंत्रित न्यूक्लियर चेन रिएक्शन शुरू हो गया है, जहां हर फिशन अगली प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है। यह उपलब्धि पावर जनरेशन टेस्टिंग की शुरुआत का संकेत है। इसके साथ ही भारत अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम के दूसरे चरण के और करीब पहुंच गया है, जो थोरियम आधारित ईंधन से ज्यादा ऊर्जा पैदा करने पर केंद्रित है।
दरअसल, भारत का तीन चरणीय न्यूक्लियर प्रोग्राम लंबे समय से थोरियम पर आधारित है और पीएफबीआर इसी रणनीति की रीढ़ है। अब पावर जनरेशन टेस्टिंग शुरू होने के साथ भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। यह उपलब्धि सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि भारत के तेजी से उभरते ‘न्यूक्लियर सुपरपावर’ बनने की दिशा में बड़ा कदम है। पीएफबीआर की खासियत है कि यह जितना ईंधन खपत करता है, उससे ज्यादा पैदा कर सकता है, यानी ऊर्जा के साथ भविष्य का ईंधन भी तैयार करता है।
इस कदम के दूरगामी असर साफ हैं। एक तरफ भारत अपनी वैज्ञानिक और रणनीतिक ताकत दिखा रहा है, तो दूसरी तरफ एशिया में शक्ति संतुलन भी बदलता नजर आ रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत की परमाणु यात्रा में ‘निर्णायक कदम’ बताया। उन्होंने कहा, “आज भारत अपनी सिविल न्यूक्लियर यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है, जो हमारे न्यूक्लियर प्रोग्राम के दूसरे चरण को आगे बढ़ाता है। कलपक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकलिटी हासिल कर ली है।”