हरियाणा निकाय चुनाव में 54.4 फीसदी मतदान दर्ज हुआ। कई जगह फर्जी वोटिंग और EVM खराबी की शिकायतें सामने आईं। चुनाव परिणाम 13 मई को घोषित होंगे।
हरियाणा में रविवार को हुए निकाय और पंचायत चुनाव शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो गए। राज्य के तीन नगर निगम, एक नगर परिषद और तीन नगर पालिकाओं में मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। प्रदेशभर में कुल 54.4 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। हालांकि पिछली बार की तुलना में इस बार वोटिंग प्रतिशत थोड़ा कम रहा। अब सभी की नजर 13 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी है। वहीं पंचायत चुनावों के परिणाम देर शाम तक जारी होने लगे।
किस शहर में कितना मतदान हुआ
निकाय चुनावों में सबसे ज्यादा मतदान सांपला और उकलाना में दर्ज किया गया। सांपला में 79.2 प्रतिशत और उकलाना में 75.7 प्रतिशत मतदान हुआ। धारूहेड़ा में 72.4 प्रतिशत, रेवाड़ी में 64.8 प्रतिशत, अंबाला में 54.4 प्रतिशत और पंचकूला में 52.3 प्रतिशत वोट पड़े। सोनीपत में सबसे कम 47.4 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। कई जगह सुबह EVM खराबी के कारण मतदान देर से शुरू हुआ, जिससे मतदाताओं को लंबी लाइन में इंतजार करना पड़ा।
सोनीपत और रेवाड़ी में फर्जी वोटिंग के आरोप
सोनीपत के एक मतदान केंद्र पर महिला मतदाता ने आरोप लगाया कि उनका वोट पहले ही कोई और डाल चुका था। महिला का कहना था कि उनके नाम पर अंग्रेजी में हस्ताक्षर किए गए, जबकि वह अंग्रेजी में साइन नहीं करतीं। रेवाड़ी में एक युवक को फर्जी वोट डालते हुए पकड़ा गया। पूछताछ में उसने कबूल किया कि वह दूसरे व्यक्ति के कहने पर वोट डालने आया था। एक अन्य मामले में लोगों ने आरोप लगाया कि एक महिला कई बार कपड़े बदलकर वोट डालने पहुंच रही थी। हालांकि प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक कार्रवाई सामने नहीं आई।
सांपला और उकलाना में भी हंगामा
सांपला में महिलाओं ने बोगस वोटिंग की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद प्रशासन ने फार्म भरवाकर दोबारा मतदान कराया। उकलाना में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कुछ बूथों पर फर्जी मतदान का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। वहीं कई बुजुर्ग मतदाताओं ने व्हीलचेयर व्यवस्था नहीं होने पर नाराजगी जताई। कुछ मतदान केंद्रों पर शाम तक लंबी कतारें लगी रहीं। पुलिस को कई जगह भीड़ नियंत्रित करने के लिए एंट्री रोकनी पड़ी।
अंबाला में भाजपा और कांग्रेस समर्थक आमने-सामने
अंबाला में चुनाव के दौरान राजनीतिक तनाव भी देखने को मिला। वार्ड नंबर 8 में भाजपा और कांग्रेस समर्थकों के बीच विवाद बढ़ गया। कांग्रेस समर्थकों ने प्रशासन पर पक्षपात के आरोप लगाए। हालात संभालने के लिए एसपी को खुद मौके पर पहुंचना पड़ा। कुछ बूथों पर EVM खराबी की शिकायतें भी आईं, जिसके बाद मशीनें बदली गईं। कई मतदाताओं को पहचान पत्र की कॉपी लाने के लिए वापस लौटना पड़ा, जिससे मतदान प्रक्रिया प्रभावित हुई।
चुनाव आयोग ने निष्पक्षता का दावा किया
राज्य निर्वाचन आयुक्त देवेंद्र कल्याण ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए थे। मतदाता सूची सत्यापन, पहचान जांच और संदिग्ध प्रविष्टियों की निगरानी पर खास फोकस रखा गया। अधिकारियों का कहना है कि शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई कर किसी भी बड़े विवाद को रोक लिया गया। अब 13 मई को निकाय चुनावों के नतीजे सामने आएंगे, जिसके बाद कई शहरों की स्थानीय राजनीति की तस्वीर साफ होगी।