फाल्टा विधानसभा सीट पर बीजेपी ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की है। जहांगीर खान के चुनाव से हटने के बाद TMC चौथे नंबर पर पहुंच गई और बीजेपी ने एक लाख से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान ने राज्य की राजनीति को बड़ा संदेश दे दिया है। डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र की इस हाईप्रोफाइल सीट पर बीजेपी ने रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज करते हुए तृणमूल कांग्रेस को चौथे नंबर पर पहुंचा दिया। बीजेपी उम्मीदवार देबांशु पांडा ने मतगणना के शुरुआती राउंड से ही बढ़त बना ली थी। 22 राउंड की गिनती पूरी होने तक उन्होंने 1 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर ली। यह अब तक बंगाल विधानसभा चुनावों में सबसे बड़े जीत अंतर में शामिल हो गया है।
फाल्टा की लड़ाई सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं रही। यह मुकाबला बीजेपी और टीएमसी की राजनीतिक ताकत, संगठन और जनाधार की परीक्षा बन गया था। खासकर तब, जब चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने खुद को चुनाव से अलग कर लिया।
बंगाल में BJP की सबसे बड़ी जीत बनी फाल्टा
फाल्टा सीट पर बीजेपी उम्मीदवार देबांशु पांडा को 1 लाख 49 हजार 666 वोट मिले। उन्होंने सीपीआईएम उम्मीदवार शंभू नाथ कुर्मी को 1 लाख 8 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। इससे पहले बंगाल में सबसे बड़े जीत अंतर का रिकॉर्ड माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट के नाम था। वहां बीजेपी के आनंदमय बर्मन ने 1 लाख 4 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी। फाल्टा ने अब वह रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है।
सीएम शुभेंदु अधिकारी ने इस जीत को जनता का भरोसा बताया और मतदाताओं का आभार जताया। पार्टी नेताओं का दावा है कि यह नतीजा बंगाल की बदलती राजनीतिक दिशा का संकेत है।
जहांगीर खान के हटने से बदला पूरा समीकरण
फाल्टा सीट पर असली मोड़ तब आया जब टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने प्रचार के आखिरी दिन खुद को चुनावी मैदान से अलग करने का ऐलान कर दिया। जहांगीर खान पहले से ही विवादों और आक्रामक बयानबाजी को लेकर चर्चा में थे। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान खुद की तुलना फिल्मी किरदार ‘पुष्पा’ से की थी और कहा था कि वह झुकेंगे नहीं। लेकिन अंतिम समय में उनके पीछे हटने से टीएमसी का पूरा समीकरण बिखर गया। हालत यह रही कि टीएमसी उम्मीदवार चौथे स्थान पर पहुंच गए। जहांगीर खान को सिर्फ 7,783 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार उनसे आगे निकल गए।
री-पोलिंग के बाद BJP के पक्ष में गया माहौल
29 अप्रैल को हुए पहले मतदान के दौरान कुछ ईवीएम में बीजेपी उम्मीदवार के सामने वाले बटन पर टेप लगाए जाने का आरोप लगा था। विवाद बढ़ने के बाद चुनाव आयोग ने पूरी सीट पर मतदान रद्द कर दिया। इसके बाद 21 मई को दोबारा वोटिंग कराई गई। री-पोलिंग के दौरान भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोबारा मतदान के बाद जनता के बीच सहानुभूति और गुस्से दोनों का फायदा बीजेपी को मिला। मतदान के बाद से ही संकेत मिलने लगे थे कि इस बार मुकाबला एकतरफा हो सकता है। नतीजों ने वही तस्वीर साफ कर दी।
देबांशु पांडा बोले- अब खत्म हुआ ‘पुष्पा राज’
रिकॉर्ड जीत के बाद बीजेपी उम्मीदवार देबांशु पांडा ने सीधे टीएमसी और जहांगीर खान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ‘पुष्पा राज’ अब खत्म हो चुका है और बंगाल में आम लोगों का दौर शुरू होगा। पांडा ने दावा किया कि जनता ने डर और दबाव की राजनीति को नकार दिया है। उन्होंने कहा कि अब राज्य में असली विकास और पारदर्शी राजनीति का समय आएगा।
फाल्टा का परिणाम बीजेपी के लिए सिर्फ एक सीट की जीत नहीं माना जा रहा। पार्टी इसे दक्षिण बंगाल में अपने बढ़ते प्रभाव और टीएमसी के कमजोर होते स्थानीय ढांचे के संकेत के तौर पर देख रही है।