चुनाव आयोग ने ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरू किया है। लक्ष्य है फर्जी नाम हटाना, पात्र मतदाताओं को जोड़ना और मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना।
भारत में चुनावी प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने की दिशा में चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। मतदाता सूची में त्रुटियों को दूर करने और वास्तविक मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तीसरे चरण की शुरुआत कर दी गई है। इस अभियान का मकसद दोहरा है। एक तरफ अपात्र या फर्जी नामों को सूची से हटाना, वहीं दूसरी तरफ ऐसे पात्र नागरिकों को शामिल करना जो अब तक मतदाता सूची से बाहर हैं। फिलहाल यह अभियान ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम में शुरू हुआ है, जहां लाखों मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा।
घर-घर पहुंचकर होगा मतदाताओं का सत्यापन
चुनाव आयोग ने बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को हर घर तक पहुंचने का निर्देश दिया है। अधिकारी मतदाताओं को एन्यूमरेशन फॉर्म उपलब्ध करा रहे हैं और उन्हें भरवाने में मदद भी कर रहे हैं। मतदाता चाहें तो फॉर्म सीधे BLO को सौंप सकते हैं या ऑनलाइन माध्यम से भी जमा कर सकते हैं। आयोग का मानना है कि घर-घर सत्यापन से मतदाता सूची की सटीकता और बढ़ेगी।
पहली बार वोट डालने वालों को भी मिलेगा मौका
अभियान सिर्फ पुराने रिकॉर्ड की जांच तक सीमित नहीं है। जो नागरिक पहली बार मतदान के लिए पात्र हुए हैं, उन्हें भी सूची में शामिल करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए BLO अपने साथ फॉर्म-6 और आवश्यक घोषणा पत्र लेकर चल रहे हैं। इससे नए मतदाता मौके पर ही आवेदन कर सकेंगे और पंजीकरण प्रक्रिया आसान होगी।
राजनीतिक दलों को भी बनाया गया भागीदार
चुनाव आयोग ने इस बार राजनीतिक दलों की भूमिका भी बढ़ाई है। राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) प्रतिदिन 50 तक फॉर्म एकत्र कर संबंधित BLO को सौंप सकेंगे। आयोग का मानना है कि विभिन्न राजनीतिक दलों की भागीदारी से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और मतदाता सूची को लेकर विवाद की संभावनाएं कम होंगी।
चार राज्यों में करोड़ों मतदाता होंगे शामिल
आंकड़ों के अनुसार इस अभियान के दायरे में बड़ी संख्या में मतदाता आएंगे। ओडिशा में 3.34 करोड़ से अधिक मतदाता हैं, जबकि मणिपुर में 20.92 लाख, मिजोरम में 8.75 लाख और सिक्किम में 4.71 लाख से ज्यादा मतदाता दर्ज हैं। इन राज्यों में हजारों BLO और BLA मिलकर सत्यापन प्रक्रिया को अंजाम दे रहे हैं। इससे मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों को पहचानने और सुधारने में मदद मिलेगी।
28 जून की समयसीमा क्यों अहम है
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म 28 जून 2026 तक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के पास पहुंच जाएंगे, उनके नाम प्रारूप मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे। आयोग ने लोगों से अपील की है कि वे समय रहते फॉर्म जमा करें और सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग करें। चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता काफी हद तक मतदाता सूची की शुद्धता पर निर्भर करती है, इसलिए इस अभियान को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।