महाराष्ट्र में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने स्वयंभू बाबा अशोक खरात को मनी लॉन्ड्रिंग और जबरन वसूली मामले में गिरफ्तार किया। छापेमारी में करोड़ों की नकदी, ज्वेलरी और लग्जरी कार बरामद हुई।
महाराष्ट्र में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बड़े कथित जबरन वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का खुलासा करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने स्वयंभू धर्मगुरु अशोक कुमार एकनाथ खरात उर्फ ‘कैप्टन बाबा’ को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी के अनुसार, आरोपी धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की आड़ में लोगों, खासकर महिलाओं को कथित तौर पर ब्लैकमेल कर अवैध वसूली करता था। एजेंसी ने 19 मई 2026 को PMLA के तहत उसे गिरफ्तार किया।
मुंबई की विशेष PMLA अदालत ने आरोपी को 26 मई तक ED हिरासत में भेज दिया है। मामले में कई करोड़ रुपये की संपत्ति, नकदी और लग्जरी सामान बरामद होने के बाद जांच और तेज कर दी गई है।
कई ठिकानों पर लगातार छापेमारी
ED ने अप्रैल और मई 2026 के दौरान आरोपी और उसके सहयोगियों से जुड़े कई ठिकानों पर अलग-अलग तारीखों में छापेमारी की। जांच एजेंसी का दावा है कि इन रेड्स के दौरान नेटवर्क से जुड़े अहम वित्तीय सुराग हाथ लगे हैं। तलाशी अभियान में दस्तावेजों के साथ डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए हैं। एजेंसी अब इनके जरिए कथित अवैध लेन-देन और संपर्कों की पड़ताल कर रही है।
करोड़ों की नकदी और लग्जरी सामान बरामद
प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई में करीब 13.92 करोड़ रुपये नकद, 5,500 अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा और लगभग 1.12 करोड़ रुपये के सोने-चांदी के आभूषण बरामद हुए हैं। इसके अलावा 2.25 करोड़ रुपये की बैंक राशि फ्रीज की गई है। जांच एजेंसी ने एक लग्जरी मर्सिडीज बेंज कार भी जब्त की है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी ने धार्मिक गतिविधियों के नाम पर बड़ी संपत्ति जुटाई।
महिलाओं को निशाना बनाने के आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी पर महिलाओं को कथित तौर पर मानसिक दबाव और डर दिखाकर ब्लैकमेल करने के आरोप हैं। ED अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे। मामले में यह भी जांच हो रही है कि अवैध वसूली का पैसा किन खातों और संपत्तियों में लगाया गया। एजेंसी वित्तीय ट्रेल के जरिए पूरे रैकेट की परतें खोलने की कोशिश कर रही है।
धर्म और अपराध के गठजोड़ पर फिर बहस
इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर धर्म की आड़ में चल रहे कथित अवैध नेटवर्क पर सवाल उठने लगे हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई स्वयंभू बाबाओं पर आर्थिक अपराध, ब्लैकमेलिंग और धोखाधड़ी जैसे आरोप लग चुके हैं। अब ED की जांच इस बात पर टिकी है कि अशोक खरात का नेटवर्क कितना बड़ा था और क्या इसमें दूसरे प्रभावशाली लोग भी जुड़े हुए थे।