Breaking News
  • मानहानि केस: राहुल गांधी की सुल्तानपुर कोर्ट में हुई पेशी, 9 मार्च को अगली सुनवाई
  • असम में गृह मंत्री अमित शाहः भारत-बांग्लादेश सीमा पर वाइब्रेंट विलेज 2.0 लॉन्च
  • नई दिल्ली: AI इंपैक्ट समिट में यूथ कांग्रेस का हंगामा, हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ता
  • शिवाजी जयंती पर हंगामा: कर्नाटक में जुलूस पर पथराव, हैदराबाद में हिंदू-मुस्लिम पक्ष में विवाद
  • मैहर में पुतला दहन के रोकने के दौरान ट्रैफिक थाना प्रभारी झुलसे, ICU में भर्ती
  • AI कंटेंट पर ‘लेबल’ अनिवार्य: 3 घंटे में हटाना होगा डीपफेक, आज से नियम लागू

होम > देश

बिहार के 42 MLA को हाईकोर्ट का नोटिस

बिहार विधानसभा स्पीकर समेत 42 MLA को हाईकोर्ट का नोटिस, चुनाव में गड़बड़ी करने के आरोप

चुनावी गड़बड़ियों और हलफनामे में गलत जानकारी के आरोप में बिहार के 42 विधायकों को हाईकोर्ट का नोटिस। स्पीकर Prem Kumar भी शामिल।


बिहार विधानसभा स्पीकर समेत 42 mla को हाईकोर्ट का नोटिस चुनाव में गड़बड़ी करने के आरोप

पटना। बिहार की सियासत में हलचल मच गई है। चुनावी गड़बड़ियों और हलफनामों में कथित गलत जानकारी देने के आरोपों पर हाईकोर्ट ने बिहार विधानसभा के 42 विधायकों को नोटिस जारी किया है। इनमें विधानसभा अध्यक्ष Prem Kumar का नाम भी शामिल है इन विधायकों की जीत को चुनौती देते हुए अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से हार चुके प्रत्याशियों ने चुनाव याचिकाएं दायर की थीं।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, पराजित उम्मीदवारों ने अपनी याचिकाओं में आरोप लगाया है कि कुछ विधायकों ने नामांकन के दौरान दाखिल हलफनामों में गलत या अधूरी जानकारी दी।इनमें संपत्ति, आपराधिक मामलों या अन्य जरूरी तथ्यों के खुलासे से जुड़े बिंदु शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, हर याचिका का आधार अलग-अलग है।इन्हीं याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित विधायकों से जवाब तलब किया है।

स्पीकर भी दायरे में

सबसे ज्यादा चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष का पद संभाल रहे Prem Kumar को भी नोटिस जारी हुआ है। कानूनी जानकारों का कहना है कि चुनाव याचिका की प्रक्रिया सामान्य संवैधानिक प्रावधान के तहत होती है। इसका मतलब यह नहीं कि अदालत ने अभी किसी को दोषी ठहरा दिया है, बल्कि यह जवाब मांगने की प्रक्रिया है। अब सभी 42 विधायकों को निर्धारित समय के भीतर अदालत में अपना जवाब दाखिल करना होगा।अगर अदालत को prima facie (प्रथम दृष्टया) कोई गंभीर तथ्य मिलता है, तो मामले की विस्तृत सुनवाई हो सकती है।