Breaking News
  • स्वदेश के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जुड़ें और हर बड़ी खबर सबसे पहले पाएं।
  • YouTube: @SwadeshNews, Facebook: @DainikSwadesh, Instagram: @swadesh_news1, X: @DainikSwadesh

होम > देश

Andhra Milk Adulteration: 16 Dead in East Godavari

आंध्र प्रदेश में मिलावट का कहर: दूध बना जहर, 16 लोगों की मौत

आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी में मिलावटी दूध पीने से 16 लोगों की मौत और कई बीमार। जांच में एथिलीन ग्लाइकॉल जैसे जहरीले पदार्थ की पुष्टि, डेयरी यूनिट जांच के घेरे में।


आंध्र प्रदेश में मिलावट का कहर दूध बना जहर 16 लोगों की मौत

दूध भी जहर बन सकता है? बशर्ते उसमें मिलावट हो। आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में दूध वाकई जहर बन गया। मिलावटी दूध पीने से त्राहिमाम मच गया और 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से बीमार हैं। उनका इलाज जारी है।

दूध में मिलावट के कारण हुई मौतों के पीछे एथिलीन ग्लाइकॉल नाम का एक जहरीला पदार्थ पाया जाना वजह रहा। दिल दहला देने वाली इस घटना से आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में कोहराम मच गया है।दरअसल, फरवरी के तीसरे सप्ताह से कोरुकोंडा मंडल के लालाचेरुवु, चौदेस्वरनगर और नरसापुरम गांवों में स्थित एक डेयरी यूनिट से 100 से अधिक परिवारों को दूध की सप्लाई की जा रही थी। इस यूनिट को ही मिलावट का संदिग्ध स्रोत माना जा रहा है। इसके बाद स्वरूपनगर में लोग बीमार पड़ने लगे।

यह दूध एक स्थानीय डेयरी यूनिट से सप्लाई किया गया था। दूध पीने के बाद लोगों में उल्टी, पेट दर्द और पेशाब बंद होने जैसे लक्षण सामने आए। इसके बाद सप्लाई तुरंत रोक दी गई। सरकार डेयरी के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रही है। गंभीर किडनी फेलियर जैसी समस्याएं भी सामने आने लगीं। कई लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।एक रिपोर्ट के मुताबिक, चौदेस्वरनगर और स्वरूपनगर जैसे इलाकों में एक्यूट रीनल फेलियर के कई मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने जांच शुरू की, तब यह खुलासा हुआ।

डेयरी ही मिलावट का संदिग्ध स्रोत

पशुपालन विभाग की टीमों ने किसी भी बाहरी प्रदूषण के कारणों का पता लगाने के लिए टॉक्सिकोलॉजिकल जांच हेतु दूध, पशु आहार और पानी के सैंपल लिए हैं। अस्पतालों में मरीजों की देखभाल के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों और विशेषज्ञ डॉक्टरों को तैनात किया गया है।

विशेष टिप्पणी

संगठित अपराध पर तंत्र बेअसर- चंद्रवेश पांडे

आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में मिलावटी दूध से 16 लोगों की मौत और कई लोगों के किडनी फेल होने की घटना केवल एक स्थानीय त्रासदी नहीं है, बल्कि आंध्र प्रदेश सहित पूरे देश के खाद्य सुरक्षा तंत्र की पोल खोलने वाला भयावह सच है।प्रयोगशाला जांच में एथिलीन ग्लाइकॉल जैसे जहरीले रसायन की पुष्टि होना इस बात का प्रमाण है कि मिलावट अब छोटे-मोटे धंधे से आगे बढ़कर संगठित अपराध का रूप ले चुकी है।

तथ्य और भी डराने वाले हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की रिपोर्टों के अनुसार, देश में हर साल लाखों खाद्य नमूनों की जांच होती है, जिनमें हजारों सैंपल फेल पाए जाते हैं। कई राज्यों में 15 से 25 प्रतिशत तक नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरते, लेकिन सजा का प्रतिशत बेहद कम है। कई मामलों में यह एक प्रतिशत से भी नीचे रह जाता है। यानी अपराध बड़ा, लेकिन दंड नगण्य।

यह समस्या सिर्फ दूध तक सीमित नहीं है। बाजार में खुलेआम मिलावट का खेल चल रहा हैमिर्च पाउडर में गेरू और सिंथेटिक रंग, काली मिर्च में पपीते के बीज, हल्दी में लेड क्रोमेट, और दालों में कंकड़ व कृत्रिम पॉलिश।2023-24 के आंकड़े बताते हैं कि कई राज्यों में मसालों और दूध उत्पादों में मिलावट के मामले सबसे अधिक सामने आए हैं। फिर भी कार्रवाई की रफ्तार इतनी धीमी है कि केस सालों तक अदालतों में लंबित रहते हैं।

सबसे भयावह तथ्य यह है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों से हर साल हजारों लोग बीमार पड़ते हैं, कई अपनी जान गंवाते हैं, लेकिन दोषियों को सजा मिलने के मामले गिने-चुने हैं। यह न्याय व्यवस्था की विफलता ही नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन के प्रति उदासीनता का प्रमाण है।अब सवाल यह नहीं है कि मिलावट हो रही है या नहीं, बल्कि यह है कि सरकारें कब जागेंगी। जरूरत है फास्ट ट्रैक अदालतों, कठोर दंड और नियमित, पारदर्शी जांच तंत्र की। जब तक मिलावटखोरों को उदाहरण बनाकर सजा नहीं दी जाएगी, तब तक हमारा भोजन सुरक्षित नहीं, बल्कि एक धीमा जहर ही बना रहेगा।

 

Related to this topic: