नई दिल्लीः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्लोबल टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 15% करने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। अमेरिकी कोर्ट के ग्लोबल टैरिफ खत्म किया। इसके ट्रंप ने कोर्ट के आदेश की अनदेखी कर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए सभी देशों पर 10% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बड़ा कदम
दरअसल, शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ को रद्द कर दिया था। 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) कानून के तहत ऐसा टैरिफ नहीं लगा सकते। यह अधिकार केवल संसद के पास है। कोर्ट के इस फैसले के बाद ट्रम्प ने नए प्रावधान का सहारा लेते हुए सेक्शन-122 के तहत 10% टैरिफ लागू कर दिया, जिसे अब बढ़ाकर 15% कर दिया गया है। यह नया टैरिफ 24 फरवरी से प्रभावी होगा।
150 दिन तक ही लागू रहेगा टैरिफ
सेक्शन-122, ट्रेड एक्ट 1974 का हिस्सा है। इसके तहत राष्ट्रपति अधिकतम 15% तक अस्थायी टैरिफ लगा सकते हैं, जो 150 दिनों तक प्रभावी रह सकता है। इसके बाद इसे जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी। ट्रम्प ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर यह टैरिफ लागू किया है। हालांकि कुछ उत्पादों को इससे छूट दी गई है, जिनमें कुछ कृषि उत्पाद, जरूरी खनिज, दवाइयां, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स और पैसेंजर वाहन शामिल हैं।
जजों पर निशाना और भारत डील पर बयान
ट्रम्प ने टैरिफ रद्द करने वाले जजों की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें कुछ जजों पर शर्म आती है। उनके मुताबिक, अगर टैरिफ नहीं लगाए गए तो विदेशी देश अमेरिकी उद्योगों से आगे निकल जाएंगे। भारत के साथ ट्रेड डील को लेकर उन्होंने कहा कि इस समझौते में कोई बदलाव नहीं होगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके अच्छे दोस्त हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की अहम बातें
ट्रम्प ने कहा कि टैरिफ लागू करने के लिए उन्हें संसद की जरूरत नहीं है और वे राष्ट्रपति को मिले अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने रिफंड को लेकर कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया है, इसलिए वसूला गया टैरिफ वापस नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट के फैसले पर विदेशी ताकतों का असर पड़ा है और यह कदम पहले ही उठाया जाना चाहिए था।
55 साल पहले भी लगा था ग्लोबल टैरिफ
साल 1971 में तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने 10% ग्लोबल टैरिफ लगाया था। उस समय अमेरिका भारी व्यापार घाटे और डॉलर पर दबाव से जूझ रहा था। बाद में इसी पृष्ठभूमि में 1974 में ट्रेड एक्ट पारित किया गया, ताकि आर्थिक आपात स्थिति में राष्ट्रपति के पास त्वरित कार्रवाई का अधिकार हो।
रिपोर्ट्स के अनुसार सेक्शन-122 का पहले कभी इस्तेमाल नहीं हुआ है। ऐसे में अगर इसे अदालत में चुनौती दी गई, तो न्यायालय इसकी व्याख्या किस तरह करेगा, यह देखना बाकी है।