अभिषेक बनर्जी पर हमले के मामले में 5 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है। ममता बनर्जी ने इसे साजिश बताते हुए अस्पताल और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। मामले में पुलिस ने वीडियो फुटेज के आधार पर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है और आगे की जांच जारी है। घटना के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हमले को सामान्य घटना मानने से इनकार करते हुए इसे गंभीर साजिश करार दिया। उन्होंने दावा किया कि हेलमेट नहीं होता तो अभिषेक की जान भी जा सकती थी।
गिरफ्तारियों के साथ अब राजनीतिक लड़ाई हमले से आगे बढ़कर अस्पताल, प्रशासन और पुलिस की भूमिका तक पहुंच गई है। ममता के आरोपों ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
वीडियो फुटेज से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
शनिवार को दक्षिण सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी उस इलाके का दौरा करने पहुंचे थे, जहां चुनाव बाद हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। इसी दौरान उन पर हमला हुआ था। घटना के बाद पुलिस ने इलाके के वीडियो फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू की। रातभर चली कार्रवाई के बाद पांच लोगों को हिरासत में लिया गया। अधिकारियों का मानना है कि फुटेज से मिली जानकारी ने आरोपियों की पहचान में अहम भूमिका निभाई।
ममता ने हमले को बताया सुनियोजित साजिश
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह कोई साधारण हमला नहीं था। उनके मुताबिक, यदि अभिषेक ने हेलमेट नहीं पहना होता तो घटना का परिणाम कहीं ज्यादा गंभीर हो सकता था। ममता ने हमले को राजनीतिक साजिश से जोड़ते हुए कहा कि विपक्षी ताकतें राज्य में तनाव का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके बयान के बाद मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि राजनीतिक संघर्ष का मुद्दा बन गया है।
अस्पताल और पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
हमले के बाद अभिषेक बनर्जी को पहले अपोलो अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद आराम की सलाह दी। बाद में उन्हें बेले व्यू अस्पताल में भी भर्ती कराया गया। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि कुछ भाजपा नेताओं और दक्षिण कोलकाता के डीसीपी की ओर से अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर दबाव बनाया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि चोट गंभीर नहीं थी तो अभिषेक को आईटीयू में क्यों रखा गया और फिर अचानक डिस्चार्ज क्यों किया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब अभिषेक का इलाज घर पर जारी रहेगा और उनके निवास पर आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था की गई है।
सोनारपुर क्यों बना राजनीतिक टकराव का केंद्र
दक्षिण 24 परगना का सोनारपुर इलाका लंबे समय से राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और तनाव का केंद्र माना जाता है। विधानसभा चुनावों के दौरान और उसके बाद यहां कई बार राजनीतिक हिंसा की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 2026 विधानसभा चुनाव के बाद मई महीने में हुई हिंसा में एक टीएमसी कार्यकर्ता की मौत हुई थी। वहीं कामराबाद नस्करपाड़ा क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ता सौमेन दास के घर में आग लगाने की घटना भी चर्चा में रही थी। इसी पृष्ठभूमि में अभिषेक बनर्जी का दौरा हो रहा था। ऐसे में उन पर हुआ हमला राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चुनावी मुकाबले के बाद बढ़ी सियासी तल्खी
सोनारपुर दक्षिण विधानसभा सीट हाल के चुनावों में चर्चा का केंद्र रही थी। यहां भाजपा की रूपा गांगुली ने टीएमसी उम्मीदवार अरुंधति मैत्रा को हराकर जीत दर्ज की थी। चुनाव परिणाम के बाद से दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। अभिषेक बनर्जी पर हमला और उसके बाद हुई गिरफ्तारियां ऐसे समय सामने आई हैं जब राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण पहले से गहरा है। अब जांच की दिशा और गिरफ्तार आरोपियों से मिलने वाली जानकारी पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह मामला आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।